Monday, July 6, 2026 |
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दावोस में केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने वैश्विक निवेशकों को भारत के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में निवेश का दिया आह्वान

by Business Remedies
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Pralhad Joshi discussing clean energy investments at World Economic Forum Davos

 

नई दिल्ली। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान भारत के स्वच्छ और हरित ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के लिए वैश्विक निवेशकों से ज़ोरदार अपील की। उन्होंने कहा कि भारत ने सोलर, पवन, ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में अपनी क्षमता और क्रियान्वयन की मजबूत क्षमता पहले ही सिद्ध कर दी है, जिससे यह क्षेत्र दीर्घकालिक निवेश के लिए आकर्षक बनता है।

दावोस में मंत्री जोशी ने कनाडा स्थित ला कैस (La Caisse) के अध्यक्ष एवं सीईओ चार्ल्स एमोंड और सीओओ सारा बुचार्ड के साथ विस्तृत चर्चा की। इस बातचीत का फोकस भारत में दीर्घकालिक जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा निवेश को मजबूत करने पर रहा। मंत्री ने X (पूर्व में ट्विटर) पर साझा जानकारी में बताया कि चर्चा के दौरान सौर, पवन और हाइब्रिड नवीकरणीय परियोजनाओं के विस्तार, ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने, तथा ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण समाधानों की संभावनाओं पर विशेष रूप से विचार किया गया।

मंत्री जोशी ने कहा कि 2030 तक जलवायु कार्रवाई के लिए ला कैस समूह की 400 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता का लाभ उठाने हेतु ‘पार्टनर विद इंडिया’ पहल को और अधिक प्रोत्साहित करने की सिफारिश की गई। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा महत्वाकांक्षाएं और ला कैस की जलवायु निवेश रणनीति के बीच मजबूत तालमेल है, जिसमें स्केलेबल, लचीले और प्रभाव-संचालित समाधानों को आगे बढ़ाने पर साझा जोर है।

इसके अलावा, मंत्री जोशी ने ओमान के उप प्रधानमंत्री के आर्थिक मामलों के कार्यालय में आर्थिक सलाहकार डॉ. सईद मोहम्मद अहमद अल सकरी के साथ भी मुलाकात की। इस बैठक में भारत–ओमान नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग को और गहरा करने पर चर्चा हुई। मंत्री ने बताया कि शुष्क और रेगिस्तानी परिस्थितियों में भी सोलर, पवन, ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण को सफलतापूर्वक बढ़ाने की भारत की क्षमता वैश्विक निवेशकों के लिए बड़े अवसर प्रस्तुत करती है।

दावोस में हुई चर्चाओं में सौर मॉड्यूल, इलेक्ट्रोलाइज़र और ग्रीन हाइड्रोजन के लिए विनिर्माण और निर्यात अवसरों पर संयुक्त सहयोग, नवीकरणीय-आधारित हाइड्रोजन हब, एकीकृत ऊर्जा परियोजनाएं और बंदरगाह-आधारित निर्यात अवसंरचना के माध्यम से भारत में निवेश को बढ़ावा देने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।

मंत्री जोशी ने कहा कि OSOWOG (वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड) के माध्यम से ग्लोबल ग्रीन एनर्जी ग्रिड के लाभों को साकार करने के लिए भारत–ओमान CEPA, संयुक्त निवेश कोष और @isolaralliance के तहत सहयोग का उपयोग करने, आगामी सौर और पवन निविदाओं में संयुक्त भागीदारी और उद्योग-नेतृत्व वाले नवाचार की संभावनाओं का भी अन्वेषण किया गया।



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