Monday, July 13, 2026 |
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पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए 32.51 करोड़ रुपए की मत्स्यपालन परियोजनाएं शुरू करेगी सरकार

by Business Remedies
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नई दिल्ली | बिजनेस रेमेडीज | मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री Rajiv Ranjan Singh उर्फ Lalan Singh आज प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और मत्स्य एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (FIDF) के तहत लगभग 32.15 करोड़ रुपए की प्रमुख परियोजनाओं का उद्घाटन और आधारशिला रखेंगे। मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह परियोजना पूर्वोत्तर क्षेत्र में आत्मनिर्भर मत्स्यपालन क्षेत्र को बढ़ावा देने और उसे विकसित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाती है।

मंत्रालय के मुताबिक, इन परियोजनाओं का उद्घाटन Mizoram के Aizawl में “क्षेत्रीय समीक्षा बैठक: पूर्वोत्तर क्षेत्र 2026” में किया जाएगा। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री Rajiv Ranjan Singh करेंगे। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री पूर्वोत्तर क्षेत्र के मत्स्यपालन लाभार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित करेंगे, जिनमें मत्स्यपालन KCC Card और सर्वश्रेष्ठ मत्स्यपालन Startup और मत्स्य सहकारी समितियों के लिए पुरस्कार शामिल हैं। साथ ही, केंद्रीय मंत्री लाभार्थियों से बातचीत करके क्षेत्र में मत्स्यपालन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए चुनौतियों और आवश्यक सहयोग को भी समझेंगे।

इस बैठक में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री SP Singh Baghel और मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री George Kurian भी शामिल होंगे। इसके अलावा, इस क्षेत्रीय समीक्षा बैठक में Arunachal Pradesh, Assam, Manipur, Meghalaya, Mizoram, Nagaland, Sikkim और Tripura के मत्स्य पालन और पशुपालन विभाग के मंत्री भी भाग लेंगे। मत्स्यपालन विभाग और पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिवों के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहेंगे। यह कार्यक्रम Hybrid Mode में आयोजित किया जाएगा। इस बैठक में राज्य मत्स्यपालन मंत्री, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और प्रमुख मत्स्यपालन संस्थानों के प्रतिनिधि पूर्वोत्तर क्षेत्र में मत्स्यपालन क्षेत्र को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। इन चर्चाओं में उत्पादन बढ़ाने, Value Chain में मौजूद कमियों को दूर करने, Market Connection को बेहतर बनाने और Export को बढ़ावा देने पर केंद्रित विचार-विमर्श किया जाएगा, साथ ही राज्यों को सहयोग देने के लिए व्यावहारिक रणनीतियों की पहचान की जाएगी।



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