- पतंजलि का संकल्प है — रासायनिक खेती से मुक्ति और प्राकृतिक समृद्धि की ओर वापसी, क्योंकि जब किसान की मिट्टी स्वस्थ होगी, तभी अन्न शुद्ध होगा, परिवार निरोगी होगा और भारत सच्चे अर्थों में आत्मनिर्भर बनेगा : Dr. Acharya Balkrishna
- मिट्टी की जाँच से ही होगी किसान की आय में वृद्धि : Dr. Yashpal Singh
हरिद्वार | बिजनेस रेमेडीज | Patanjali Research Foundation, Samriddh Gram एवं Uttarakhand State Rural Livelihood Mission (USRLM) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘धरती का डॉक्टर (DKD) मृदा परीक्षण तकनीक’ विषयक तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 13 जून को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। 11 से 13 जून 2026 तक Patanjali परिसर, Haridwar में आयोजित इस प्रशिक्षण में Uttarakhand के Haridwar जनपद से आई कृषि सखियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम देश के किसानों, विशेषकर ग्रामीण महिला कृषकों को आधुनिक मृदा विज्ञान से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। ‘धरती का डॉक्टर’ तकनीक के माध्यम से मिट्टी की सेहत को सरल एवं सटीक रूप से जाँचना अब संभव हो गया है, जिससे किसान अपनी फसल के अनुरूप सही उर्वरकों का चुनाव कर सकते हैं और उत्पादन लागत में कमी लाते हुए आय में वृद्धि कर सकते हैं।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में Dr. Vedpriya Arya ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए Patanjali Research Foundation की कृषि, अनुसंधान एवं ग्रामीण विकास गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि Patanjali का लक्ष्य केवल उत्पाद निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि जड़ से जुड़कर भारतीय किसान को सशक्त बनाना इसका मूल उद्देश्य है।
इसके पश्चात Dr. Yashpal Singh ने मृदा परीक्षण के वैज्ञानिक महत्व पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने यह भी बताया कि N, P, K सहित सूक्ष्म पोषक तत्वों की जानकारी के बिना खेती करना अनुमान के आधार पर चलना है। दूसरे दिन Dr. K. N. Sharma ने DKD मृदा परीक्षण तकनीक की संपूर्ण कार्यप्रणाली पर विस्तार से जानकारी दी। ARC (कृषि अनुसंधान केंद्र) टीम एवं कृषि विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को DKD किट के सभी चरणों का हाथों-हाथ प्रशिक्षण दिया। उर्वरक अनुशंसा प्रणाली को समझाते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि किस प्रकार मृदा परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर फसलवार उर्वरक योजना तैयार की जा सकती है।
कार्यक्रम के अंतिम दिन Sushil Kumar Agrawal ने ग्रामीण युवाओं एवं महिलाओं के लिए स्वरोजगार एवं उद्यमिता के अवसरों पर प्रेरणादायी मार्गदर्शन प्रदान किया। इसके साथ ही प्रतिभागियों द्वारा DKD मृदा परीक्षण का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया, जिसमें प्रत्येक प्रतिभागी ने स्वयं नमूना लेने से लेकर रिपोर्ट तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया। प्रशिक्षण के समापन पर प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कार्यक्रम की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि पूर्णत: व्यावहारिक एवं उपयोगी भी रहा। समापन सत्र में प्रतिभागियों का लिखित एवं व्यावहारिक मूल्यांकन किया गया। सभी सफल प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए तथा उन्हें DKD किट के साथ क्षेत्र में कार्य प्रारंभ करने हेतु प्रोत्साहित किया गया।

