बिजऩेस रेमेडीज/जयपुर Naryana Hospital, जयपुर के कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. शुभम शर्मा और उनकी टीम ने एक असाधारण उपलब्धि हासिल की, जब 22 वर्षीय यूपीएससी अभ्यर्थी ने acute respiratory distress syndrome और उससे जुड़ी गंभीर जटिलताओं को मात देकर नया जीवन पाया।
मरीज की स्थिति इतनी गंभीर थी कि उन्हें ICU में लंबे समय तक भर्ती रहना पड़ा, वेंटिलेटर सपोर्ट, प्रोनिंग पोज़िशन और लगातार निगरानी की आवश्यकता पड़ी। हालात और बिगड़े जब उन्हें प्न्यूमोमीडियास्टिनम और दोनों फेफड़ों में न्यूमोथोरैक्स फेफड़ों में हवा भर जाना जिससे उसमें सिकुडऩ जाती है जैसी जटिलताएँ हो गईं। लगातार पाँच दिन तक दवाइयों का असर न होने पर चिकित्सकीय टीम ने नया उपचार शुरू किया। विशेषज्ञों की सतत निगरानी और देखभाल से धीरे-धीरे फेफड़े स्वस्थ होने लगे। धीरे-धीरे वेंटिलेटर और ट्यूब्स हटाए गए और अंतत: मरीज ने खुद से सांस लेना शुरू किया। इस कठिन जंग का नेतृत्व डॉ. शुभम शर्मा ने किया। उनकी टीम के डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मचारियों ने दिन-रात मेहनत कर इस असंभव लगने वाली चुनौती को जीत में बदला। डॉ. शर्मा का कहना है की, ‘मेडिसिन सिर्फ़ बीमारी का इलाज नहीं है, यह उम्मीद, जीवन और सपनों को लौटाने का नाम है। नारायणा अस्पताल, जयपुर अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम के साथ जटिल से जटिल बीमारियों का सफल इलाज करने के लिए समर्पित है। अस्पताल का उद्देश्य हर मरीज को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएँ और नई उम्मीद देना है।’

