बिजऩेस रेमेडीज/ नई दिल्ली/आईएएनएस वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा को बताया कि राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (Nabard ) ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों (2022-23 से 2024-25) में ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए राज्य सरकारों को लोन के रूप में 1.59 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि वितरित की है।
केंद्रीय मंत्री ने एक लिखित उत्तर में बताया कि इस राशि में से 1.23 लाख करोड़ रुपए नाबार्ड के रूरल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (RIDF) के माध्यम से वितरित किए गए हैं, जबकि शेष 36,439 करोड़ रुपए वित्तीय संस्थान की अन्य योजनाओं के तहत दिए गए हैं। इनमें नाबार्ड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट असिस्टेंस (एनआईडीए), रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर असिस्टेंस टू स्टेट गवर्नमेंट्स (RIAS), लॉन्ग टर्म इरिगेशन फंड (LTIF), माइक्रो इरिगेशन फंड (MIF), फूड प्रोसेसिंग फंड (FPF), वेयरहाउस इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (डब्ल्यूआईएफ) और फिशरीज एंड एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (एफआईडीएफ) शामिल हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से नाबार्ड की वित्तीय सहायता ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सडक़, सिंचाई और भंडारण सुविधाओं को बढ़ाती है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ती है और बाजार तक बेहतर पहुंच बनती है। इससे ग्रामीण उधारकर्ताओं की लोन को प्रभावी ढंग से अवशोषित करने और उसका उपयोग करने की क्षमता में सुधार होता है। नाबार्ड सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) को रियायती दरों पर कृषि लोन के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक फंड भी प्रदान करता है।
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, Nabard अखिल भारतीय ग्रामीण वित्तीय समावेशन सर्वेक्षण 2021-22 के निष्कर्षों के अनुसार, संस्थागत स्रोतों से लोन प्राप्त करने वाले कृषि परिवारों का अनुपात 2016-17 में 60 प्रतिशत से बढक़र 2021-22 में 75 प्रतिशत हो गया। उन्होंने आगे कहा कि Nabard ने विभिन्न योजनाओं के तहत अब तक 6,215 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन को बढ़ावा दिया है। एफपीओ को प्रदान की जाने वाली प्रमुख सहायता में एफपीओ का गठन, क्षमता निर्माण, ऋण सुविधा और बाजार संपर्क सहायता, वित्तीय साक्षरता आदि शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, नाबार्ड ने लघु कृषक कृषि-व्यवसाय संघ और ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) के साथ साझेदारी में एफपीओ उत्पादों के विपणन और ब्रांडिंग को सक्षम बनाने के लिए 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 50 स्थानों पर एफपीओ मेले आयोजित किए हैं।

