Monday, July 6, 2026 |
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MIT World Peace University ने गन्ने के रस से Hydrogen उत्पादन और उन्नत Biodiesel तकनीक में नवाचार की घोषणा की

by Business Remedies
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बिजऩेस रेमेडीज/पुणे MIT World Peace University (MITWPU) ने सतत ऊर्जा अनुसंधान में दो प्रमुख प्रगति की घोषणा की है: गन्ने के रस से सीधे हरित Hydrogen (Green Hydrogen) उत्पन्न करने की एक अनोखी प्रक्रिया और एग्रो-वेस्ट आधारित हेटेरोजीनियस कैटालिस्ट का उपयोग करते हुए बायोडीजल उत्पादन के लिए एक अभिनव बैच रिएक्टर प्रणाली। ये दोनों विकास भारत की हरित ऊर्जा संक्रमण और सतत भविष्य की दिशा में MITWPU की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। विश्वविद्यालय ने गन्ने के रस से सूक्ष्मजीवों की सहायता से हाइड्रोजन उत्पन्न करने की एक विशेष प्रक्रिया विकसित की है, जो कार्बन डाइऑक्साइड को भी एसिटिक एसिड में परिवर्तित करती है, जिससे यह प्रक्रिया और अधिक सतत बन जाती है। यह शोध भारत सरकार के ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का समर्थन करता है और चीनी उद्योगों को हाइड्रोजन उत्पादन का अवसर देता है, जिससे आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम हो सकती है। इस तकनीक के लिए पेटेंट पहले ही दायर किया जा चुका है और परियोजना प्रस्ताव को नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) को फंडिंग के लिए प्रस्तुत किया गया है।
Green Hydrogen पर उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव भी रूहृक्रश्व को भेजा गया है। डॉ. भारत काले, एमेरिटस प्रोफेसर और मैटेरियल साइंस केंद्र के निदेशक ने बताया, कि हमारी बायोप्रोसेस तकनीक कमरे के तापमान पर गन्ने का रस, समुद्री जल और अपशिष्ट जल का उपयोग कर कार्य करती है, जिससे वैश्विक स्तर पर हाइड्रोजन लागत को $1 प्रति किलोग्राम तक लाने के प्रयासों को बल मिलता है। पारंपरिक जल-विच्छेदन विधियों की तुलना में यह प्रक्रिया मूल्यवान उप-उत्पाद उत्पन्न करती है, जिससे शून्य अपशिष्ट (zero discharge) सुनिश्चित होता है और यह भारत की ऊर्जा रूपांतरण यात्रा के लिए एक व्यवहारिक समाधान बनती है। हाइड्रोजन भंडारण के लिए मेटालो-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क (MOF) का उपयोग कर अनुसंधान कार्य भी प्रगति पर है, जिसमें CO2 कैप्चर पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। विश्वविद्यालय का लक्ष्य उद्योगों को इस तकनीक के स्केल-अप में सहयोग करना है, और यह अगले एक वर्ष के भीतर व्यावसायिक रूप से सक्षम हो सकती है। इस परियोजना का नेतृत्व डॉ. सागर कानेकर, डॉ. भारत काले, डॉ. आनंद कुलकर्णी, प्रो. निरज टोपरे, डॉ. संतोष पाटिल, डॉ. देव थापा, डॉ. बिस्वास और डॉ. रत्नदीप जोशी कर रहे हैं।
इसके अलावा, MITWPU ने कृषि अपशिष्ट आधारित हेटेरोजीनियस कैटालिस्ट का उपयोग कर टिकाऊ Biodiesel उत्पादन के लिए एक कुशल बैच रिएक्टर प्रणाली विकसित की है। इस कैटालिस्ट और प्रणाली को पेटेंट कराया गया है, जो अपशिष्ट उत्पादन को समाप्त कर पर्यावरण-अनुकूल समाधान प्रदान करती है और कृषि अवशेषों का किफायती व प्रभावी उपयोग करती है।



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