New Delhi,
केंद्र सरकार ने खान क्षेत्र में सुधार और उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। खान मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्यों को पूंजी निवेश में सहायता देने वाली योजना के तहत 5,000 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना लागू करने की घोषणा की है। यह पहल पिछले वित्त वर्ष की सफलता के बाद शुरू की गई है।
मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, इस योजना के संचालन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी हाल ही में जारी किए गए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य खदानों के संचालन को तेज करना, खनिज उत्पादन बढ़ाना, राज्यों की आय में वृद्धि करना और खान क्षेत्र के समग्र प्रशासन को मजबूत बनाना है। इस योजना के तहत राज्यों और विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेशों को तीन प्रमुख सुधार क्षेत्रों में प्रोत्साहन दिया जाएगा।
पहले चरण में राज्यों को खान मंत्रालय के एकीकृत पोर्टल से जुड़ना होगा ताकि खदानों के संचालन में तेजी लाई जा सके। इसके अलावा, भूमि से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए पूर्व-नीलामी समिति का गठन, खदानों की नियमित निगरानी के लिए राज्य स्तरीय समन्वय समिति बनाना, प्रमुख खनिजों के लिए वार्षिक नीलामी कैलेंडर तैयार करना और उसका पालन करना, तथा खनिज गुणवत्ता की गलत वर्गीकरण को रोकने के लिए तकनीकी उपाय अपनाना आवश्यक होगा। यदि कोई राज्य 15 दिसंबर 2026 तक इन सभी सुधारों को पूरा करता है, तो उसे 100 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन मिलेगा।
दूसरे चरण में राज्यों को प्रमुख खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी और उनके संचालन के आधार पर प्रोत्साहन दिया जाएगा। 31 दिसंबर 2026 तक यदि कोई राज्य आवश्यक स्वीकृतियों जैसे वन, पर्यावरण और भूमि अनुमति के साथ खनिज ब्लॉकों की नीलामी करता है, तो उसे प्रति ब्लॉक 20 करोड़ रुपये मिलेंगे, जिसकी अधिकतम सीमा 200 करोड़ रुपये प्रति राज्य होगी। इसके अलावा, 31 मार्च 2026 तक नीलाम किए गए ब्लॉकों में से कम से कम 10 प्रतिशत का उत्पादन शुरू करने पर राज्य को 250 करोड़ रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाएगा।
तीसरे चरण में राज्य खान तैयारी सूचकांक 2026-27 के आधार पर सुधारों को बढ़ावा दिया जाएगा। इस सूचकांक में श्रेणी A, B और C के अंतर्गत शीर्ष तीन राज्यों को क्रमशः 100 करोड़ रुपये, 75 करोड़ रुपये और 50 करोड़ रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। केंद्र सरकार की यह योजना खान क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने, निवेश को आकर्षित करने और राज्यों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

