कोरोना महामारी, आर्थिक मंदी की आशंका और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत के निर्यात में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। यह यहां के उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सार्थक पहल कही जा सकती है। पिछले दो वर्षों में भारत के निर्यात में 6.3 फीसदी की वृद्धि हुई है। वर्ष, 2024-25 में भारत ने 825 बिलियन डॉलर का निर्यात किया। इस दौरान रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, रसायन और फार्मास्यूटिकल्स जैसे सामानों का निर्यात किया गया। यूं कहे सकते हैं कि 13 वर्षों की अवधि में भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में वैश्विक निर्यात में अपनी हिस्सेदारी सबसे तेज रफ्तार से बढ़ाने में सफल रहा है। भारत का निर्यात लगभग तीन गुना बढ़ा है। भारत विभिन्न देशों में रत्न और आभूषण जिनमें कटे और पॉलिश किए गए हीरे, सोने के आभूषण, मोती और अन्य रत्न, इंजीनियरिंग सामानों में मशीनरी, उपकरण और ऑटोमोबाइल पार्ट्स, पेट्रोलियम उत्पाद डीजल तथा अन्य पेट्रोलियम डेरिवेटिव, रसायन में फार्मास्युटिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स,फार्मास्यूटिकल्स में दवाएं, टीके और अन्य चिकित्सा उत्पाद, कृषि उत्पाद में चावल, कपास और अन्य, इलेक्ट्रॉनिक्स में मोबाइल फोन, कंप्यूटर, अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का निर्यात करता आ रहा है। जहां जापान और रूस जैसी कुछ विकसित अर्थव्यवस्थाओं ने अपने निर्यात हिस्से में मामूली वृद्धि या स्थिरता दर्ज की है। वहीं इसके विपरित भारत के निर्यात में लगातार वृद्धि का रुझान रहा है, जो इसके व्यापार क्षेत्र की मजबूती को बताता है। यह भारत की व्यापार नीतियों, विनिर्माण एवं क्षेत्रों की प्रभावशीलता और निर्यात संवर्धन पहल के प्रभाव को दर्शाता है, जिसने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में देश के एकीकरण को बढ़ाने में योगदान दिया है।

