नई दिल्ली,
भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement-BTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में आज से नई व्यापार वार्ताएं शुरू होने जा रही हैं। 2 जून से 4 जून तक चलने वाली इन बैठकों में दोनों देशों का लक्ष्य समझौते के पहले चरण को जल्द पूरा करना है, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई दिशा मिल सकती है।
केंद्र सरकार के अनुसार प्रस्तावित अंतरिम समझौते की व्यापक रूपरेखा पर पहले ही सहमति बन चुकी है। अब वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देना और शेष तकनीकी मुद्दों का समाधान करना होगा। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि लगभग 99 प्रतिशत वार्ता पूरी हो चुकी है और केवल कुछ मुद्दों पर चर्चा शेष है। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच पहले BTA पर हस्ताक्षर की घोषणा जल्द की जा सकती है। इसके बाद समझौते के दूसरे चरण को लेकर भी बातचीत जारी रहेगी। इस व्यापार समझौते के पहले चरण में कई महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। इनमें बाजार पहुंच बढ़ाना, गैर-शुल्कीय बाधाओं को कम करना, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाना, निवेश को प्रोत्साहित करना तथा आर्थिक सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना प्रमुख हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार वार्ता के दौरान अमेरिका के व्यापार कानून की धारा 301 के तहत लगाए गए शुल्कों पर भी चर्चा होने की संभावना है। भारत इन शुल्कों और उनसे जुड़े व्यापारिक विवादों में राहत की मांग कर सकता है। यह मुद्दा दोनों देशों के बीच वार्ता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में विशेष व्यापारिक लाभ मिल सकता है। इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत होगी और अन्य देशों की तुलना में भारतीय निर्यातकों को बेहतर अवसर प्राप्त हो सकते हैं। अमेरिका की ओर से वार्ता का नेतृत्व मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच करेंगे, जबकि भारत की टीम का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन करेंगे। दोनों पक्षों के अधिकारी अब तक अधिकांश विषयों पर सहमति बना चुके हैं और शेष तकनीकी पहलुओं को सुलझाने पर काम कर रहे हैं।
इस बीच अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पारस्परिक शुल्क नीति के खिलाफ फैसला सुनाया था। यह नीति वर्ष 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम के तहत लागू की गई थी। न्यायालय के फैसले के बाद अमेरिकी प्रशासन ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए सभी देशों से होने वाले आयात पर समान 10 प्रतिशत शुल्क लागू कर दिया था। इसी कारण मुख्य वार्ताकारों की एक प्रस्तावित बैठक पहले टल गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच यह व्यापार समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निवेश, आपूर्ति श्रृंखला, विनिर्माण और रणनीतिक आर्थिक सहयोग को भी नई मजबूती प्रदान करेगा। ऐसे में आगामी तीन दिनों की वार्ताएं दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

