Monday, July 13, 2026 |
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भारत-अमेरिका हाइड्रोकार्बन साझेदारी से 2030 तक $500 Billion व्यापार लक्ष्य को मिल सकती है बड़ी गति

by Business Remedies
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India And United States Strengthen Hydrocarbon Energy Partnership To Achieve $500 Billion Bilateral Trade Goal By 2030

भारत और अमेरिका के बीच हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में बढ़ता सहयोग वर्ष 2030 तक दोनों देशों के साझा $500 Billion व्यापार लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा क्षेत्र में गहरी होती साझेदारी न केवल द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाएगी, बल्कि निवेश, ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती को भी नया आधार प्रदान करेगी। अमेरिका-भारत व्यापार परिषद और ग्रांट थॉर्नटन भारत द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, द्रवीकृत प्राकृतिक गैस, कच्चा तेल, द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस, एथेन तथा प्रोपेन जैसे हाइड्रोकार्बन उत्पाद आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार विस्तार के प्रमुख साधन बन सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन क्षेत्रों में बढ़ता व्यापार निवेश के नए अवसर खोलेगा और दोनों देशों की ऊर्जा आवश्यकताओं को अधिक सुरक्षित तथा स्थिर बनाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत-अमेरिका ऊर्जा संबंध अब केवल खरीदार और विक्रेता तक सीमित नहीं रहे हैं। यह संबंध व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, आधारभूत ढांचे और ऊर्जा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक विस्तारित होकर एक रणनीतिक साझेदारी का रूप ले रहा है। अमेरिका-भारत व्यापार परिषद के भारत प्रबंध निदेशक राहुल शर्मा ने कहा कि भारत और अमेरिका के ऊर्जा संबंधों का विकास दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि विश्वसनीय साझेदार होने के नाते दोनों देश ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और निवेश के क्षेत्रों में मिलकर काम कर सकते हैं, जिससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, आर्थिक विकास को गति मिलेगी और द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के नए अवसर पैदा होंगे।

रिपोर्ट में तीन प्रमुख प्राथमिकताओं पर विशेष जोर दिया गया है। इनमें हाइड्रोकार्बन व्यापार के आकार और मूल्य में वृद्धि करना, निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक और स्थिर वातावरण तैयार करना तथा दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाना शामिल है। ग्रांट थॉर्नटन भारत के भागीदार तथा ऊर्जा एवं नवीकरणीय उद्योग प्रमुख अमित कुमार ने कहा कि भारत-अमेरिका ऊर्जा साझेदारी अब एक नए चरण में प्रवेश कर रही है। यह साझेदारी केवल वस्तु व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश, प्रौद्योगिकी, आधारभूत ढांचे और आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्रों में भी गहरा सहयोग विकसित कर रही है।

रिपोर्ट में भारत में अमेरिकी निवेश के लिए कई बड़े अवसरों की पहचान की गई है। इनमें तेल और गैस खोज एवं उत्पादन, द्रवीकृत प्राकृतिक गैस अवसंरचना, शहरी गैस वितरण, गैस आधारित विद्युत उत्पादन तथा पेट्रोरसायन विकास जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में निवेश से भारत की ऊर्जा क्षमता बढ़ने के साथ-साथ रोजगार और औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिल सकता है। इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय कंपनियां अमेरिका के ऊर्जा क्षेत्र में अपनी उपस्थिति और मजबूत कर सकती हैं। इसके लिए वे द्रवीकृत प्राकृतिक गैस निर्यात सुविधाओं, तेल एवं गैस परिसंपत्तियों, शेल संसाधनों तथा पेट्रोरसायन कच्चा माल आपूर्ति श्रृंखलाओं में निवेश कर सकती हैं।

रिपोर्ट में भारत-अमेरिका एआई आधारित ऊर्जा कार्यबल के गठन की भी सिफारिश की गई है। इसका उद्देश्य हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में उन्नत तकनीकों के उपयोग को तेज करना होगा। कार्यबल ऊर्जा मांग पूर्वानुमान, भूकंपीय आंकड़ों के विश्लेषण, ऊर्जा खोज प्रक्रिया के अनुकूलन, पूर्वानुमान आधारित रखरखाव तथा वास्तविक समय परिसंपत्ति निगरानी जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने पर काम करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देश ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करते हैं, तो यह न केवल व्यापार लक्ष्य हासिल करने में मदद करेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में दोनों देशों की रणनीतिक स्थिति को भी अधिक सशक्त बनाएगा।



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