नई दिल्ली,
जारी Economic Survey 2025-26 में कहा गया है कि वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है और देश अब एक प्रमुख भागीदार के रूप में उभर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक वस्तु निर्यात और वाणिज्यिक सेवा निर्यात में भारत की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विश्व व्यापार संगठन के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2005 से 2024 के बीच वैश्विक वस्तु निर्यात में भारत की हिस्सेदारी लगभग दोगुनी होकर 1 प्रतिशत से बढ़कर 1.8 प्रतिशत हो गई है। इसी अवधि में वैश्विक वाणिज्यिक सेवा निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत से बढ़कर 4.3 प्रतिशत हो गई, जो दोगुने से अधिक वृद्धि को दर्शाती है।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत का बाहरी क्षेत्रीय प्रदर्शन वैश्विक झटकों के प्रति लचीलापन दिखाता है। यह तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की उन संरचनात्मक विशेषताओं को भी रेखांकित करता है, जो वैश्विक बाजारों के साथ गहरे एकीकरण को प्रदर्शित करती हैं। वित्त वर्ष 2025 में भारत का कुल निर्यात 825.3 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जिसमें वर्ष दर वर्ष 6.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि मुख्य रूप से सेवा निर्यात में 13.6 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी के कारण संभव हुई। यह निर्यात गति वित्त वर्ष 2026 में भी जारी रही, जहां पहली, दूसरी और तीसरी तिमाही में अब तक का सर्वाधिक निर्यात दर्ज किया गया, जबकि वैश्विक अनिश्चितताएं बनी रहीं।
वित्त वर्ष 2025 में वस्तु निर्यात 437.7 अरब डॉलर रहा। इसमें गैर-पेट्रोलियम निर्यात 374.3 अरब डॉलर के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। इलेक्ट्रॉनिक्स, औषधि, विद्युत मशीनरी और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों ने निर्यात वृद्धि को गति दी, जिससे उच्च मूल्य विनिर्माण क्षेत्रों में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता स्पष्ट हुई। कृषि निर्यात वित्त वर्ष 2020 के 34.5 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 51.1 अरब डॉलर हो गया, जिसमें 8.2 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की गई। सर्वेक्षण में कहा गया है कि आने वाले चार वर्षों में कृषि, समुद्री उत्पाद और खाद्य एवं पेय पदार्थों के संयुक्त निर्यात को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने की क्षमता है।
भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच संपन्न CETA तथा भारत और ओमान के बीच CEPA समझौते, साथ ही अमेरिका, चिली और पेरू के साथ जारी वार्ताएं, भारत की विविधीकृत व्यापार रणनीति को मजबूती देती हैं और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में गहरे एकीकरण का मार्ग प्रशस्त करती हैं। सेवा निर्यात भी वित्त वर्ष 2025 में 387.6 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जिसमें 13.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। सर्वेक्षण के अनुसार यह वृद्धि भारत के Global Capability Centres के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने के कारण भी है, जहां वित्त वर्ष 2020 से वित्त वर्ष 2025 के बीच 7 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की गई।

