Monday, February 16, 2026 |
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वैश्विक चुनौतियों के बीच देश का औद्योगिक क्षेत्र मजबूती से आगे बढ़ा

by Business Remedies
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India Industrial Sector Growth Highlights From Economic Survey 2025-26

नई दिल्ली,

 देश का औद्योगिक क्षेत्र वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। Economic Survey 2025-26 में कहा गया है कि आधारभूत ढांचा, लॉजिस्टिक्स, कारोबार सुगमता और नवाचार तंत्र में सुधारों के कारण औद्योगिक गतिविधियों को निरंतर समर्थन मिल रहा है। सर्वेक्षण में स्पष्ट किया गया है कि औद्योगीकरण के अगले चरण में केवल आयात प्रतिस्थापन पर आधारित मॉडल से हटकर प्रतिस्पर्धा, नवाचार और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में गहरे एकीकरण की दिशा में संतुलित बदलाव आवश्यक होगा। सर्वेक्षण के अनुसार, हर क्षेत्र में पूर्ण आत्मनिर्भरता के बजाय रणनीतिक लचीलापन विकसित करना अधिक महत्वपूर्ण है। इसके लिए विविधीकरण और क्षमताओं की गहराई बढ़ाने पर जोर दिया गया है। निजी क्षेत्र को अनुसंधान, प्रौद्योगिकी अपनाने, कौशल विकास और गुणवत्ता प्रणालियों में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता बताई गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश Economic Survey के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में उद्योग सकल मूल्य वर्धन 7.0 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जो पिछले वित्त वर्ष में 5.9 प्रतिशत की दर से अधिक है। विनिर्माण क्षेत्र का सकल मूल्य वर्धन FY26 की पहली और दूसरी तिमाही में क्रमशः 7.72 प्रतिशत और 9.13 प्रतिशत रहा। यह वृद्धि संरचनात्मक बदलावों और उच्च मूल्य वाले विनिर्माण खंडों की ओर बढ़ते रुझान के कारण संभव हुई है।

सर्वेक्षण में कहा गया है कि औद्योगिक गलियारों के माध्यम से आधारभूत ढांचे की उपलब्धता में सुधार हुआ है और कंपनियों में प्रौद्योगिकी के उपयोग तथा औपचारिकरण में वृद्धि हुई है। मध्यम और उच्च प्रौद्योगिकी आधारित गतिविधियां अब कुल विनिर्माण मूल्य वर्धन का 46.3 प्रतिशत हिस्सा बनाती हैं। यह उपलब्धि उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना और भारत सेमीकंडक्टर मिशन जैसी पहलों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, औषधि, रसायन और परिवहन क्षेत्रों में घरेलू क्षमताओं के सुदृढ़ीकरण से जुड़ी है। वैश्विक स्तर पर भी भारत की स्थिति मजबूत हुई है। Competitive Industrial Performance रैंकिंग में भारत 2023 में 37वें स्थान पर पहुंचा, जबकि 2022 में यह 40वें स्थान पर था। मुख्य उद्योगों ने भी मजबूती दिखाई है। भारत इस्पात और सीमेंट उत्पादन में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बना हुआ है। चीन के बाद भारत सीमेंट उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। देश में प्रति व्यक्ति सीमेंट खपत लगभग 290 किलोग्राम है, जबकि वैश्विक औसत 540 किलोग्राम है। इस्पात क्षेत्र में पिछले पांच वर्षों में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ है, जिसका प्रमुख कारण निर्माण और विनिर्माण क्षेत्रों से मजबूत घरेलू मांग रही है। कोयला उद्योग ने भी वित्त वर्ष 2024-25 में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। कुल 1,047.52 मिलियन टन कोयले का उत्पादन हुआ, जो पिछले वर्ष के 997.83 मिलियन टन की तुलना में 4.98 प्रतिशत अधिक है।

रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र भी औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस क्षेत्र का योगदान वित्त वर्ष 2023-24 में कुल विनिर्माण सकल मूल्य वर्धन में 8.1 प्रतिशत रहा। वहीं, वाहन उद्योग ने वित्त वर्ष 2015 से 2025 के दौरान उत्पादन में लगभग 33 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। Economic Survey में कहा गया है कि आगे की राह में भारत को प्रतिस्पर्धा, गुणवत्ता और नवाचार पर ध्यान केंद्रित करते हुए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी भागीदारी और मजबूत करनी होगी, ताकि औद्योगिक क्षेत्र दीर्घकालिक और टिकाऊ विकास पथ पर बना रहे।



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