मुंबई,
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कहा है कि कृषि क्षेत्र के समग्र लाभ के लिए विशेष Artificial Intelligence सम्मेलन आयोजित करने वाला महाराष्ट्र देश का पहला राज्य बन गया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार किसानों को डिजिटल सेवाओं से सशक्त बनाकर उनकी आय और जीवन स्तर सुधारने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है।
मुख्यमंत्री ने रविवार को “कृषि में Artificial Intelligence पर वैश्विक सम्मेलन और निवेशक शिखर सम्मेलन (AI for Agri 2026)” के उद्घाटन अवसर पर कहा कि किसान अब विभिन्न डिजिटल अनुप्रयोगों के माध्यम से अपनी भाषा में सवाल पूछकर तुरंत कृषि संबंधी समाधान प्राप्त कर सकते हैं। यह कार्यक्रम “महाराष्ट्र कृषि Artificial Intelligence नीति 2025–2029” के अंतर्गत आयोजित किया गया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में डिजिटल आधारभूत संरचना और Artificial Intelligence को राष्ट्रीय विकास के लिए विशेष महत्व दिया गया है। India AI Mission का उद्देश्य तकनीक के माध्यम से समावेशिता, पारदर्शिता और व्यापक प्रभाव सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि कृषि हर घर और हर व्यक्ति से जुड़ी हुई है, इसलिए महाराष्ट्र ने कृषि क्षेत्र में Artificial Intelligence क्रांति का नेतृत्व करने का संकल्प लिया है। राज्य ने व्यापक Artificial Intelligence आधारित कृषि नीति की घोषणा की है। सरकार ने “महा-विस्तार AI” नामक डिजिटल मंच विकसित किया है, जो किसानों के लिए एक डिजिटल साथी की तरह कार्य करता है। इस मंच के माध्यम से किसान फसल परामर्श, मौसम संबंधी जानकारी, कीट प्रबंधन, बाजार भाव की प्रवृत्तियां और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। अब तक लगभग 30 लाख किसान इस अनुप्रयोग का उपयोग कर चुके हैं और पंजीकरण की संख्या लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र केवल Artificial Intelligence का उपयोगकर्ता नहीं रहेगा, बल्कि जिम्मेदार और प्रभावी उपयोग में अग्रणी राज्य बनेगा। चूंकि हर किसान के पास स्मार्टफोन उपलब्ध नहीं है और सभी केवल मराठी भाषा का उपयोग नहीं करते, इसलिए सरकार ने बहुभाषी और आवाज आधारित डिजिटल सेवाएं शुरू की हैं। इन सेवाओं को राज्य के प्रत्येक तालुका और गांव तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने कहा कि तकनीक के इस युग में भी किसान ही कृषि नवाचार का केंद्र बिंदु रहना चाहिए। Artificial Intelligence, ड्रोन तकनीक और इंटरनेट ऑफ थिंग्स को किसानों के पारंपरिक ज्ञान के साथ जोड़कर महाराष्ट्र की कृषि को वैश्विक मॉडल बनाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि Artificial Intelligence आधारित कृषि नीति 2025–2029 के क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार ने लगभग 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। तीन मिलियन अर्थात लगभग 30 लाख से अधिक किसानों ने महा-विस्तार अनुप्रयोग डाउनलोड किया है। राज्य का लक्ष्य Artificial Intelligence के माध्यम से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान करना, महिलाओं को सशक्त बनाना और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना है। इसके लिए जिलों में Artificial Intelligence और कृषि-प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
राज्य सरकार ने रविवार को कई Artificial Intelligence अनुप्रयोगों की भी शुरुआत की, जिनमें “महा एग्री-एक्स” (कृषि डेटा विनिमय मंच), भीली जनजातीय भाषा के लिए भाषा मॉडल, महा-विस्तार वॉयस टेलीफोनी अनुप्रयोग तथा चित्र आधारित पहचान तकनीक से फसल रोग और कीटों की पहचान करने वाली Artificial Intelligence प्रणाली शामिल हैं।
इस अवसर पर वन स्टेप फाउंडेशन और विश्व बैंक के बीच त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके तहत महाराष्ट्र की Artificial Intelligence सक्षम डिजिटल सार्वजनिक आधारभूत संरचना “महा-विस्तार” के स्थापत्य ढांचे, संचालन प्रणाली, क्रियान्वयन अनुभव और खुले मानकों का दस्तावेजीकरण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त नीदरलैंड की वैगेनिंगेन विश्वविद्यालय एवं अनुसंधान संस्था के साथ भी एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया, जिससे कृषि क्षेत्र में जिम्मेदार और प्रभावी Artificial Intelligence उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। इस सहयोग से महाराष्ट्र के कृषि विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के बीच साझेदारी मजबूत होगी।

