भारत में FY27 के दौरान विभिन्न उद्योगों में कर्मचारियों के वेतन में औसतन 8.6 प्रतिशत से 10.2 प्रतिशत तक वृद्धि होने का अनुमान है। यह वृद्धि मुख्य रूप से कुशल, विशेषज्ञ और कार्यान्वयन-केंद्रित कर्मचारियों की लगातार बढ़ती मांग के कारण देखने को मिल सकती है। यह जानकारी टीमलीज़ सर्विसेज की नवीनतम रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष में वेतन वृद्धि का परिदृश्य स्थिर रहने के साथ-साथ विभिन्न उद्योगों के बीच अलग-अलग स्तर पर दिखाई देगा। सबसे अधिक वृद्धि वाले क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहन एवं इलेक्ट्रिक वाहन अवसंरचना, वित्तीय प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा एवं औषधि उद्योग तथा विद्युत एवं ऊर्जा क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में कर्मचारियों के वेतन में 9.6 प्रतिशत से 10.2 प्रतिशत तक वृद्धि होने की संभावना जताई गई है।
विशिष्ट पदों की बात करें तो विद्युत अभियंताओं के वेतन में 11.2 प्रतिशत तक वृद्धि होने का अनुमान है। वहीं गुणवत्ता नियंत्रण निरीक्षकों के लिए 10.9 प्रतिशत, सूचना प्रौद्योगिकी सहायता अधिकारियों के लिए 10.3 प्रतिशत तथा गुणवत्ता आश्वासन अभियंताओं और साइट अभियंताओं के लिए 10.2 प्रतिशत तक वेतन वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। यह अध्ययन 23 उद्योगों और 20 शहरों में मौजूद 1,268 व्यवसायों से प्राप्त आंकड़ों और जानकारियों पर आधारित है। रिपोर्ट में चेन्नई, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद को वेतन वृद्धि के प्रमुख केंद्रों के रूप में चिन्हित किया गया है। इन शहरों में बढ़ते औद्योगिक निवेश, नए व्यापारिक अवसरों और रोजगार सृजन के कारण प्रतिभाशाली कर्मचारियों की मांग लगातार बढ़ रही है।
स्थिर और टिकाऊ विकास वाले उद्योगों में भी कर्मचारियों को अच्छा लाभ मिलने की संभावना है। इनमें वाहन उद्योग, खुदरा क्षेत्र, बीमा क्षेत्र तथा व्यवसाय प्रक्रिया आउटसोर्सिंग क्षेत्र शामिल हैं। इन उद्योगों में वेतन वृद्धि 8.9 प्रतिशत से 9.5प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। कुछ विशेष पद ऐसे हैं जहां वेतन वृद्धि उद्योग की औसत वृद्धि से अधिक रहने की संभावना है। परियोजना अभियंताओं के वेतन में 10.7 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। वहीं पर्यावरण, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा अधिकारियों, सूचना प्रौद्योगिकी सहायता अधिकारियों तथा संबंध अधिकारियों के वेतन में लगभग 10.1 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है।
टीमलीज़ सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बालासुब्रमण्यम ए के अनुसार, FY26-27 के दौरान भारत का वेतन परिदृश्य अधिक विशेषज्ञता-आधारित और परिणाम-केंद्रित बनता जा रहा है। अब वेतन वृद्धि केवल पारंपरिक महानगरों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में उद्योग-विशिष्ट विकास और विशेष कौशल की मांग के आधार पर तय हो रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उभरते शहर भी प्रतिभा आधारित अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैं। औद्योगिक विस्तार, कॉर्पोरेट निवेश और विकसित होते व्यापारिक परिवेश के कारण इन शहरों में रोजगार के नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे देशभर में रोजगार बाजार अधिक संतुलित और व्यापक होता दिखाई दे रहा है।
हालांकि कुछ उद्योगों में वेतन वृद्धि अपेक्षाकृत नियंत्रित रहने की संभावना है। बैंकिंग, निर्माण एवं रियल एस्टेट, दूरसंचार तथा वस्त्र उद्योग जैसे क्षेत्रों में वेतन वृद्धि 8.6 प्रतिशत से 8.8 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान लगाया गया है। कार्यात्मक विभागों की बात करें तो बिक्री एवं विपणन, अभियंत्रण और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सबसे अधिक वृद्धि का रुझान देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में रोजगार बाजार पर पद-विशिष्ट विशेषज्ञता और उद्योग-आधारित वेतन संरचना का प्रभाव और अधिक बढ़ेगा।

