Monday, July 13, 2026 |
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रूस से कच्चे तेल का आयात 34 प्रतिशत बढ़ा

चीन के बाद रूसी हाइड्रोकार्बन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना भारत

by Business Remedies
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भारत ने जून में रूस से कच्चे तेल का आयात 34 प्रतिशत बढ़ाया, Jamnagar, Paradip, Kochi और Vadinar रिफाइनरियों ने बढ़ाई खरीद

वैश्विक कीमतों में गिरावट के बीच रूस के निर्यात राजस्व पर दबाव

नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क | वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बीच भारत ने जून में रूस से कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। Centre for Research on Energy and Clean Air (CREA) की रिपोर्ट के अनुसार, जून में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात 34 प्रतिशत बढ़कर 4.5 अरब यूरो पहुंच गया। इसके साथ ही भारत China के बाद रूस से हाइड्रोकार्बन खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया।

आयात में 34 प्रतिशत की हुई जोरदार बढ़ोतरी

CREA की रिपोर्ट के मुताबिक जून में भारत ने रूस से 4.5 अरब यूरो का कच्चा तेल खरीदा, जो मई की तुलना में 34 प्रतिशत अधिक है। जून में भारत के कुल रूसी जीवाश्म ईंधन आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी 83 प्रतिशत रही। कुल रूसी हाइड्रोकार्बन आयात का मूल्य 5.5 अरब यूरो रहा, जिससे भारत China के बाद दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया।

रिफाइनरियों ने बढ़ाई रूसी तेल की खरीद

रिपोर्ट के अनुसार, देश की प्रमुख रिफाइनरियों ने जून में रूसी कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की। Reliance Industries की Jamnagar Refinery में आयात 150 प्रतिशत बढ़ा, जबकि Indian Oil Corporation की Paradip Refinery में 126 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। Bharat Petroleum की Kochi Refinery में खरीद 83 प्रतिशत और Nayara Energy की Vadinar Refinery में 45 प्रतिशत बढ़ी।

रूस के निर्यात को मिला सहारा, राजस्व पर दबाव

भारत की बढ़ती मांग के चलते जून में रूस के कच्चे तेल के निर्यात की मात्रा में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम रहने के कारण रूस की निर्यात आय घटकर 348 मिलियन यूरो प्रतिदिन रह गई। कुल जीवाश्म ईंधन निर्यात से होने वाली आय भी एक प्रतिशत घटकर 734 मिलियन यूरो प्रतिदिन दर्ज की गई।

तेल उत्पाद और कोयले का आयात भी बढ़ा

रिपोर्ट में बताया गया कि कच्चे तेल के अलावा भारत ने रूस से 488 मिलियन यूरो के तेल उत्पाद और 444 मिलियन यूरो का कोयला भी आयात किया। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध रूसी ऊर्जा संसाधनों के कारण भारत की खरीद आगे भी मजबूत बनी रह सकती है।



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