नई दिल्ली,
भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही में पूंजी निवेश में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में कुल निवेश बढ़कर लगभग 5.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 2.9 अरब डॉलर था। इस तरह year-on-year आधार पर 72 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह अब तक किसी भी तिमाही में दर्ज किया गया सबसे अधिक निवेश माना जा रहा है, जिसमें प्रमुख भूमिका डेवलपर्स और रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (REITs) की रही।
घरेलू निवेशकों का दबदबा, डेवलपर्स सबसे आगे
रिपोर्ट के अनुसार, इस तिमाही में कुल निवेश का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा घरेलू निवेशकों द्वारा किया गया। इसमें डेवलपर्स की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत रही, जबकि REITs ने करीब 40 प्रतिशत योगदान दिया। खास बात यह रही कि REITs के माध्यम से 2 अरब डॉलर से अधिक का निवेश दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेशकों के मजबूत भरोसे को दर्शाता है। देश की आर्थिक मजबूती और स्थिरता के कारण वैश्विक चुनौतियों के बावजूद निवेश लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पिछली तिमाही (Q4 2025) के मुकाबले भी निवेश में 53 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे यह संकेत मिलता है कि संस्थागत निवेशकों का भरोसा लगातार बना हुआ है और वे दीर्घकालिक निवेश के लिए इस क्षेत्र को प्राथमिकता दे रहे हैं।
कार्यालय परिसंपत्तियों और भूमि अधिग्रहण में सबसे अधिक निवेश
जनवरी-मार्च तिमाही में निवेश का बड़ा हिस्सा तैयार कार्यालय परिसंपत्तियों और भूमि अधिग्रहण में गया। कुल निवेश का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इन्हीं क्षेत्रों में केंद्रित रहा। भूमि अधिग्रहण में लगाए गए कुल निवेश का लगभग 73 प्रतिशत हिस्सा मिश्रित उपयोग और आवासीय परियोजनाओं में लगाया गया, जबकि शेष निवेश कार्यालय, गोदाम और आतिथ्य परियोजनाओं में किया गया। बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली-एनसीआर ने कुल निवेश में लगभग 65 प्रतिशत की हिस्सेदारी दर्ज की। यह दर्शाता है कि बड़े शहरों में रियल एस्टेट गतिविधियां सबसे अधिक सक्रिय बनी हुई हैं।
विदेशी निवेश में सिंगापुर और कनाडा की प्रमुख भूमिका
विदेशी निवेश की बात करें तो सिंगापुर से आने वाला निवेश कुल विदेशी निवेश का 72 प्रतिशत रहा, जबकि कनाडा का योगदान 27 प्रतिशत रहा। इससे यह स्पष्ट होता है कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का रुझान भी भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, REITs की बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि भारतीय रियल एस्टेट बाजार अब अधिक संगठित और परिपक्व हो रहा है। आने वाले समय में विदेशी निवेश में और तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।

