नई औद्योगिक क्रांति की शुरुआत: भारत के वर्ष 2047 तक ‘Viksit Bharat’ बनने के लक्ष्य की दिशा में देश की अर्थव्यवस्था तेजी से नए औद्योगिक क्षेत्रों की ओर बढ़ रही है। Global investment bank Jefferies ने अपनी रिपोर्ट में भारत की “New Industrial Revolution” को आगे बढ़ाने वाले 6 हाई-ग्रोथ सेक्टरों की पहचान की है।
घरेलू बाजार और नीतिगत समर्थन: Jefferies के अनुसार, भारत का बड़ा घरेलू बाजार, Private Sector की बढ़ती भागीदारी और सरकार की नीतिगत पहलें नए उद्योगों के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सरकार द्वारा Tax incentives, Production-linked योजनाएं, Localisation और Private participation को बढ़ावा देने से इन सेक्टरों में तेजी आने की उम्मीद है।
Space Economy में बड़ा अवसर: रिपोर्ट के मुताबिक भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिनके पास Space सेक्टर में वैश्विक प्रतिस्पर्धी क्षमता है। देश की Space Economy वर्ष 2030 तक 5 गुना बढ़कर 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। Skyroot, Pixxel और Agnikul जैसी Private कंपनियां Commercial execution की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
Semiconductor और Data Centre Growth: Semiconductor सेक्टर में भारत की योजना अब Policy से Execution की ओर बढ़ रही है। करीब 20 अरब डॉलर के निवेश, निर्माणाधीन Chip Fab और OSAT Projects से इस Industry को मजबूती मिल रही है। वहीं Data Centre Capacity पिछले 5 वर्षों में 5 गुना बढ़कर 2 GW हो चुकी है और अगले 5 वर्षों में इसके 10 GW तक पहुंचने की उम्मीद है।
Electronics और Solar Manufacturing: भारत Electronics Manufacturing में Assembly से आगे बढ़कर Domestic Value Addition और Component Manufacturing पर ध्यान दे रहा है। Mobile Components में Domestic Value Addition अगले 6 वर्षों में 20 प्रतिशत से बढ़कर करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। वहीं Solar PV Manufacturing में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्माता बन चुका है।
Aerospace सेक्टर में बढ़ती भूमिका: भारत Aerospace Industry में भी तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। Cost-effective Manufacturing और Skilled Engineering Talent के कारण देश Global Aerospace Supply Chain का अहम हिस्सा बन रहा है। Boeing और Airbus भारत से हर साल करीब 1.4-1.6 अरब डॉलर के Components Source करते हैं।

