New Delhi,
भारत टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने वाली नीतियों, जैव-आधारित पहलों और तेज़ी से विकसित हो रहे नवाचार तंत्र के बल पर Bio-Economy क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र देश की आर्थिक प्रगति और कृषि विकास का महत्वपूर्ण आधार बनेगा। रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग के सचिव तेजवीर सिंह ने कहा कि भारत के पास मजबूत वैज्ञानिक आधार, समृद्ध जैव विविधता और तेजी से बढ़ते नवउद्यम तंत्र के कारण Bio-Economy तथा जैव-आधारित कृषि-इनपुट क्षेत्र में विश्व स्तर पर अग्रणी बनने की अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने यह बात दो दिवसीय संगोष्ठी एवं कार्यशाला ‘BIOPSF 2026’ के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने विश्वास जताया कि वैज्ञानिक उत्कृष्टता, उद्योग एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच प्रभावी साझेदारी तथा उभरते युवा नवप्रवर्तकों का तकनीकी योगदान भविष्य की टिकाऊ कृषि प्रणालियों को नई दिशा देगा। तेजवीर सिंह ने कहा कि जैव-कीटनाशकों की सफलता केवल उनके विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके लिए मजबूत निर्माण प्रौद्योगिकियों का विकास भी आवश्यक है। इससे उत्पादों की स्थिरता, खेतों में प्रभावशीलता, उपयोग में सरलता और किसानों द्वारा स्वीकार्यता बढ़ेगी।
‘BIOPSF 2026’ का आयोजन कीटनाशक निर्माण प्रौद्योगिकी संस्थान, गुरुग्राम द्वारा किया गया। यह संस्थान रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग का एक स्वायत्त संस्थान है।
सचिव ने कहा कि भारत जब “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य और मजबूत Bio-Economy की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब देश में स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को सशक्त बनाने, अनुसंधान को व्यावहारिक उपयोग से जोड़ने तथा नवउद्यम आधारित नवाचार को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है। विशेष रूप से जैव-आधारित रसायनों, फसल संरक्षण प्रौद्योगिकियों और टिकाऊ कृषि उत्पादों के क्षेत्र में नए प्रयासों को बढ़ावा देना समय की मांग है। मंत्रालय के अनुसार यह कार्यक्रम कीटनाशक निर्माण प्रौद्योगिकी संस्थान के 36वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में नीति निर्माता, वैज्ञानिक, उद्योग प्रतिनिधि, नियामक संस्थाएं, शिक्षाविद, उद्यमी, नवउद्यम, विद्यार्थी और शोधकर्ता शामिल हुए।
इस दौरान जैव-आधारित कृषि उत्पादों में हाल के विकास, टिकाऊ कृषि में उनकी भूमिका तथा कृषि क्षेत्र के भविष्य को अधिक पर्यावरण-अनुकूल और उत्पादक बनाने के उपायों पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने माना कि जैव-आधारित कृषि समाधान किसानों की लागत कम करने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और कृषि उत्पादकता में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सरकार का मानना है कि इस दिशा में निरंतर निवेश और नवाचार भारत को वैश्विक Bio-Economy क्षेत्र का प्रमुख केंद्र बनाने में सहायक सिद्ध होगा।

