नई दिल्ली: भारत के गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) क्षेत्र की कुल बैलेंस शीट वित्त वर्ष 2028 तक बढ़कर ₹.92.9 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि के दौरान क्षेत्र में लगभग 15 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज होने की संभावना है।
रेटिंग एजेंसी ब्रिकवर्क रेटिंग्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2025 में एनबीएफसी क्षेत्र की कुल परिसंपत्तियां ₹.61.1 लाख करोड़ पर पहुंच गई थीं। इस वृद्धि के पीछे खुदरा ऋण, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) तथा सेवा क्षेत्र में मजबूत ऋण मांग प्रमुख कारण रही। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में ऋण वृद्धि दर 19.4प्रतिशत रही, जो अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की 11.5 प्रतिशत वृद्धि दर से काफी अधिक थी। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 से वित्त वर्ष 2028 के बीच ऋण वृद्धि औसतन 16 प्रतिशत रहेगी। इससे देश में वित्तीय समावेशन को और मजबूती मिलेगी, हालांकि परिवारों और एमएसएमई क्षेत्र पर ऋण भार भी बढ़ सकता है।
ब्रिकवर्क रेटिंग्स ने कहा कि एनबीएफसी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका वित्तीय प्रणाली में इसकी अहमियत को और मजबूत कर रही है। इसके साथ ही बैंकों और म्यूचुअल फंडों के साथ इसकी भागीदारी भी बढ़ रही है। हालांकि, इससे ऋण चक्र से जुड़े जोखिम और तरलता संबंधी चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं, जिसके चलते अधिक सख्त नियामकीय मानकों और खुलासों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। ब्रिकवर्क रेटिंग्स के रेटिंग्स निदेशक हेमंत सागरे के अनुसार, भारत का एनबीएफसी क्षेत्र स्थिर स्थिति में बना हुआ है। संतुलित लेकिन मजबूत ऋण वृद्धि, परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार तथा डिजिटल प्रणालियों के बढ़ते उपयोग से क्षेत्र को मजबूती मिल रही है। हालांकि निकट अवधि में मजबूत वृद्धि के बावजूद असुरक्षित ऋण और ग्रामीण ऋण खंडों में दबाव बढ़ने के संकेत भी दिखाई दे रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती वित्तपोषण लागत, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का प्रभाव और कड़े नियामकीय नियम जोखिम के स्वरूप को बदल रहे हैं। जिन एनबीएफसी कंपनियों के पास बेहतर डिजिटल जोखिम प्रबंधन प्रणाली और नियामकीय अनुपालन व्यवस्था है, वे आने वाले समय में अधिक स्थिर प्रदर्शन कर सकती हैं। परिसंपत्ति गुणवत्ता के मोर्चे पर भी क्षेत्र ने उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (जीएनपीए) वित्त वर्ष 2024 के 3.5 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2025 में 2.9 प्रतिशत पर आ गईं। वहीं शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) लगभग 1 प्रतिशत के स्तर पर स्थिर बनी रहीं। इसका कारण विभिन्न क्षेत्रों में सुधार और नए खराब ऋणों में कमी माना गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में परिसंपत्ति गुणवत्ता सामान्य रूप से स्थिर बनी रह सकती है। यह स्थिति परिवारों की आय, एमएसएमई क्षेत्र की कमाई तथा ऋण भार की प्रवृत्तियों पर निर्भर करेगी। पर्याप्त पूंजी भंडार और सतर्क प्रावधान व्यवस्था के कारण खराब ऋणों पर नियंत्रण बनाए रखने में मदद मिलेगी। दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो एनपीए की दिशा अनुशासित ऋण विस्तार, मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षित ऋण वितरण तथा प्रभावी निगरानी प्रणालियों पर निर्भर करेगी। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि यदि ये कारक मजबूत बने रहते हैं तो एनबीएफसी क्षेत्र आने वाले वर्षों में भी तेज वृद्धि के साथ वित्तीय स्थिरता बनाए रख सकता है।

