- वाणिज्य मंत्रालय की रिपोर्ट
- भारतीय दवाएं दुनियाभर में छाईं, निर्यात में बढ़ी देश की हिस्सेदारी
- रत्न और अन्य उत्पादों को निर्यात करने में भी भारत आगे
जयपुर। भारत की वैश्विक निर्यात में लगातार हिस्सेदारी बढ़ रही है। ऐसे में वह वैश्विक खिलाड़ी बनकर उभर रहा है। पेट्रोलियम, रत्न, कृषि उपकरण, रसायन और चीनी जैसे क्षेत्र में पिछले पांच साल में भारत का निर्यात तेजी से बढ़ रहा है। अब दवाओं के क्षेत्र में भी भारत ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी डाटा के मुताबिक, भारत ने वर्ष 2018 से 2023 के बीच इन क्षेत्रों में वैश्विक व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है।
साथ ही ग्लोबल एक्सपोर्ट में इलेक्ट्रिकल सामान, न्यूमेटिक टायर, नल व सेमीकंडक्टर उपकरणों में भी हिस्सेदारी बढ़ी है। वर्ष 2023 में पेट्रोलियम निर्यात बढक़र 84.96 अरब डॉलर हो गया। इसके साथ ही वैश्विक व्यापार में भारत की बाजार हिस्सेदारी वर्ष 2018 के 6.45 प्रतिशत से बढक़र 2023 में 12.59 प्रतिशत हो गई। इस श्रेणी में भारत पांचवें स्थान से बढक़र दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है। भारत अब यूरोप का सबसे बड़ा ईंधन सप्लायर है।
7.99 प्रतिशत बढ़ा दवाइयों का निर्यात
प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआइ) स्कीम का असर अब इलेक्ट्रानिक्स आइटम्स के बाद ड्रग्स और फार्मास्युटिकल्स (दवाओं) के निर्यात पर भी दिखने लगा है। सरकारी डाटा के मुताबिक, पिछले 5 साल से भारत से अमरीका और यूरोप को दवाइयों का निर्यात लगातार बढ़ रहा है। भारत से सबसे अधिक दवा निर्यात अमरीका में किया जा रहा है। चालू वित्त वर्ष 2024-25 में अप्रेल-सितंबर के दौरान भारत के कुल दवा निर्यात में 33 प्रतिशत हिस्सेदारी अमरीका की है। 2024-25 की पहली छमाही में जहां कुल वस्तुओं के निर्यात में सिर्फ 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं दवा निर्यात 7.99 प्रतिशत बढक़र 14.45 अरब डॉलर रहा। आगामी आर्डर को देखते हुए दवा निर्यात इस वित्त वर्ष 30 अरब डालर पार करने की उम्मीद है।
भू राजनीतिक तनाव के बावजूद निर्यात बढऩा सुखद
इस संबंध में फियो के अध्यक्ष अश्विनी कुमार ने कहा, वर्तमान में बढ़ते भू राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत का निर्यात बढऩा सुखद संकेत है। आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद निर्यात बढऩा काफी अच्छा है। वर्तमान में इंजीनियरिंग, रसायन, प्लास्टिक, फार्मा, रेडीमेड परिधान और इलेक्ट्रोनिक्स आदि में अच्छी वृद्धि देश में रोजगार में रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए अच्छा संकेत हैं।
राजस्थान से भी निर्यात बढ़ा
वित्त वर्ष 2023-24 में राजस्थान से कुल निर्यात 83,704 करोड़ रुपए का हुआ। इसमें रत्न आभूषण की हिस्सेदारी 11,183 करोड़ रुपए रही। इसके अलावा राजस्थान से अन्य सेक्टरों में भी निर्यात में तेजी दर्ज की गई है। अगर जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से यूरोपीय देशा के लिए सीधे कनेक्टिवटी हो तो निर्यात को और बढ़ाया जा सकता है। अभी फिलहाल राजस्थान से परिधान, ज्वैलरी, हैंडीक्राफ्ट के साथ खिलौने, मेटल, होम डेकोर जैसे क्षेत्रों में निर्यात बढऩे बढ़ रहा है। इनकी मांग लैटिन अमरीकी देशों में ज्यादा है, जिनमें चिली, कोलंबिया, इक्वेडोर, साउथ जार्जिया, उरूग्वे, कोस्टारिका जैसे देश शामिल हैं। जयपुर से फिलहाल मस्कट, शारजाह, दुबई, अबू धाबी, कुआलालंपुर और बैंकॉक ही सीधे निर्यात हो रहा है। अगर सीधी उड़ानें हों तो यहां से यूरोप, अमरीका, अफ्रीकी देशों के साथ-साथ जापान, सिंगापुर, हांगकांग, चीन, वियतनाम, ऑस्ट्रेलिया, रूस, कजाकिस्तान जैसे देशों में निर्यात हो सकता है।
वर्जन
भारत के साथ-साथ राजस्थान से भी निर्यात में बढ़ोतरी हो रही है। मशीनरी की 11 प्रतिशत ग्रोथ है। वहीं इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रिॉनिक्स की 25 प्रतिशत, व्हीकल में 9 प्रतिशत की ग्रोथ आ रही है। इसके अलावा मेडिकल और डायग्नोस्टिक उपकरण में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है। हालंाकि अभी कुछ सेक्टर में कमी भी दर्ज हुई, जिनमें अपेरल्स, मेडअप्स, फुटवियर, स्पोट्र्स और जेम्स एंड ज्वैलरी। ये ऐसे सेक्टर हैं। जहां निर्यात बढ़ाने की आश्यकता है। कुल मिलाकर निर्यात बढऩा अच्छी खबर है। इसे और बढ़ाने के प्रयास करने चाहिए, जिससे विकसित भारत की दिशा में कदम को और मजबूती से बढ़ावा जा सके।
* भूपिंदर सिंह, अध्यक्ष, फियो राजस्थान

