नई दिल्ली,
भारत के primary market ने वर्ष 2026 की शुरुआत मजबूती के साथ की है। पहली तिमाही में initial public offering (IPO) के जरिए कुल 2.5 अरब डॉलर की राशि जुटाई गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 7.8 प्रतिशत अधिक है। यह वर्ष 2018 के बाद पहली तिमाही का सबसे बेहतर प्रदर्शन माना जा रहा है। लंदन स्टॉक एक्सचेंज समूह (एलएसईजी) की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर भी भारत एक महत्वपूर्ण IPO केंद्र बना रहा। इस अवधि में दुनिया भर में जुटाई गई कुल राशि में भारत की हिस्सेदारी लगभग 8 प्रतिशत रही।
पूंजी बाजार में मजबूती, लेकिन सौदों की गति धीमी
रिपोर्ट में बताया गया कि व्यापक equity capital market में स्थिरता बनी रही, हालांकि वैश्विक अनिश्चितताओं का असर सौदों की गति पर देखने को मिला। follow-on offering ने कुल जुटाई गई राशि में 58 प्रतिशत का योगदान दिया, जो इस तिमाही का प्रमुख हिस्सा रहा। क्षेत्रवार विश्लेषण में वित्तीय कंपनियां सबसे आगे रहीं। इस क्षेत्र ने लगभग 1.2 अरब डॉलर जुटाए और बाजार में कुल हिस्सेदारी का पांचवां हिस्सा अपने नाम किया। इसमें राजमार्ग इंफ्रा निवेश ट्रस्ट का IPO प्रमुख रहा। ऊर्जा और बिजली क्षेत्र दूसरे स्थान पर रहे, जहां 1.0 अरब डॉलर की राशि जुटाई गई। इस क्षेत्र में पिछले वर्ष की तुलना में 127 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई।
खुदरा निवेश में तेज उछाल
खुदरा निवेश गतिविधि में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई। यह लगभग तीन गुना बढ़कर 893.4 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई और कुल बाजार में 15.1 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की। हालांकि, कुल मिलाकर सौदों की संख्या में कमी देखी गई। भारत से जुड़े mergers and acquisitions (विलय और अधिग्रहण) के सौदों का कुल मूल्य 44.5 प्रतिशत घटकर 17.4 अरब डॉलर रह गया। ऋण बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। भारतीय संस्थाओं द्वारा bond जारी कर 19.5 अरब डॉलर जुटाए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 39 प्रतिशत कम है। यह पिछले एक दशक की सबसे कमजोर पहली तिमाही रही। वित्तीय संस्थानों ने bond के जरिए धन जुटाने में प्रमुख भूमिका निभाई और कुल निर्गम का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अपने नाम किया।
विशेषज्ञों की राय
एलएसईजी डील्स इंटेलिजेंस की वरिष्ठ प्रबंधक एलेन टैन ने कहा कि भारत में वर्ष की शुरुआत सावधानी के साथ हुई है। बड़े सौदों और विलय-अधिग्रहण की गति में स्पष्ट कमी आई है। उन्होंने कहा कि अनिश्चितता के माहौल में निवेशक और कंपनियां अब आकार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग, घरेलू समेकन और परिसंपत्ति बिक्री पर अधिक ध्यान दे रहे हैं, जिससे केवल चुनिंदा क्षेत्रों में ही गतिविधि देखने को मिल रही है।

