नई दिल्ली,
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुआ आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौता (ईसीटीए) पिछले चार वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण साबित हुआ है। इस समझौते के लागू होने के बाद भारत के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 में भारत का ऑस्ट्रेलिया को निर्यात जहां लगभग 4 अरब डॉलर था, वहीं वित्त वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 8.5 अरब डॉलर से अधिक हो गया। इस तरह निर्यात में दोगुने से ज्यादा की वृद्धि देखने को मिली है। वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 24.1 अरब डॉलर रहा, जबकि भारत के निर्यात में पिछले वर्ष की तुलना में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2025-26 में फरवरी तक भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कुल व्यापार 19.3 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जो इस समझौते के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है।
व्यापार में आसान पहुंच और शुल्क में छूट
इस समझौते के तहत भारत ने अपने लगभग 70.3 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर ऑस्ट्रेलिया को विशेष बाजार पहुंच दी है, जो कुल व्यापार मूल्य के 90.6 प्रतिशत को कवर करता है। वहीं ऑस्ट्रेलिया ने भारत से आने वाले 100 प्रतिशत आयात को विशेष बाजार पहुंच प्रदान की है। समझौते के लागू होते ही 98.3 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क समाप्त कर दिया गया, जबकि शेष 1.7 प्रतिशत को पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जा रहा है। January 1, 2026 से भारत के सभी निर्यातों को ऑस्ट्रेलिया में शून्य शुल्क के साथ बाजार में प्रवेश मिल रहा है। इस समझौते का लाभ कई क्षेत्रों को मिला है। वस्त्र, औषधि, रसायन और कृषि उत्पादों के निर्यात में तेजी देखी गई है। वहीं आयात के क्षेत्र में भी यह समझौता महत्वपूर्ण साबित हुआ है, जिससे भारत को आधार धातु, कच्चा कपास, रसायन, उर्वरक और दालों जैसे आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता आसान हुई है। इससे देश के विनिर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों को मजबूती मिली है और आपूर्ति श्रृंखला भी अधिक सुदृढ़ हुई है।
ऑर्गेनिक उत्पादों में सहयोग बढ़ा
दोनों देशों के बीच September 24, 2025 को ऑर्गेनिक उत्पादों के लिए पारस्परिक मान्यता समझौता भी किया गया। इस पहल के तहत दोनों देश एक-दूसरे की प्रमाणन प्रणाली को मान्यता देते हैं, जिससे निर्यातकों को लागत और समय की बचत होती है। इससे ऑर्गेनिक व्यापार में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ा है तथा इस क्षेत्र में सहयोग और मजबूत हुआ है। यह व्यापार समझौता अब दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों का एक मजबूत आधार बन चुका है। इससे व्यापार, लघु उद्योग, श्रमिकों और उपभोक्ताओं सभी को प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है।

