भारत ने पिछले दशक में नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में काफी कदम उठाए हैं। इस ओर निरंतर आगे बढ़ भी रहा है। इनोवेशन इकोसिस्टम वह समग्र व्यवस्था है, जिसमें शोध संस्थान, विश्वविद्यालय, उद्योग, स्टार्टअप, निवेशक, सरकार, कुशल मानव संसाधन और तकनीकी अवसंरचना मिलकर नए विचारों को उत्पाद, सेवाओं और व्यवसायों में बदलते हैं। यह वह वातावरण है जो नवाचार को जन्म देता है और उसे बाजार तक पहुंचाता है। यदि किसी विश्वविद्यालय में नई तकनीक विकसित होती है, उसे स्टार्टअप अपनाता है, निवेशक पूंजी देते हैं और सरकार नीति सहायता देती है, तो यह पूरा तंत्र एक इनोवेशन इकोसिस्टम कहलाता है। भारत ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में 38वें स्थान पर पहुंच गया है। आने वाले समय में भारत की डीप-टेक और एआई जैसे क्षेत्रों में स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद है। भारत दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप केंद्रों में से एक बन चुका है। सरकार की स्टार्टअप इंडिया योजना, फंड ऑफ फंड्स, सीड फंड और क्रेडिट गारंटी योजनाओं ने नवाचार आधारित उद्यमों को बढ़ावा दिया है। वर्ष, 2025 तक लाखों रोजगार सृजित करने वाले दो लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप मौजूद हैं। वहीं भारत ने आधार, यूपीआई, डिजिलॉकर, ओएनडीसी जैसी डिजिटल प्रणालियां विकसित की हैं, जिनके आधार पर हजारों नए व्यवसाय और तकनीकी समाधान विकसित हो रहे हैं। सरकार ने अनुसंधान, विकास और नवाचार के लिए 1 लाख करोड़ के कोष की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य उच्च-जोखिम और उच्च-प्रभाव वाली तकनीकों को प्रोत्साहन देना है। सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, जैव-प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रहा है। सेमीकंडक्टर स्टार्टअप्स में निवेश की तेज वृद्धि इसका संकेत है। भारत की स्थिति लगातार बेहतर हुई है और वह वैश्विक नवाचार सूचकांक में शीर्ष 40 देशों के निकट पहुंच चुका है। इनोवेशन इकोसिस्टम केवल तकनीकी प्रगति का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास, रोजगार, प्रतिस्पर्धात्मकता और आत्मनिर्भरता का आधार है। भारत ने स्टार्टअप, डिजिटल अवसंरचना, अनुसंधान और उभरती प्रौद्योगिकियों में मजबूत नींव तैयार कर ली है।

