नई दिल्ली,
प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव शक्तिकांत दास ने कहा है कि भारत ने हर वैश्विक संकट के दौरान न केवल मजबूती से सामना किया है, बल्कि हर बार और अधिक सशक्त बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में देश की प्रगति उसकी आर्थिक क्षमता और नीतिगत स्थिरता को दर्शाती है।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक नेतृत्व सम्मेलन में संबोधित करते हुए दास ने कहा कि भारत की यात्रा यह साबित करती है कि चुनौतियों के बीच भी विकास की गति बनाए रखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि हर संकट के समय देश ने केवल मुश्किलों को सहन नहीं किया, बल्कि उनसे सीख लेकर अपनी स्थिति को और बेहतर बनाया है। उन्होंने बताया कि इस समय वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता और तनाव के दौर से गुजर रही है। भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं और विभिन्न क्षेत्रों में असमान वृद्धि जैसी समस्याएं सामने हैं। दास के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था में जोखिम अभी भी नीचे की ओर झुके हुए हैं, जिससे आने वाले समय में चुनौतियां बनी रह सकती हैं।
इन परिस्थितियों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था ने मजबूत प्रदर्शन किया है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में देश की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रही, जबकि पिछले पांच वर्षों में औसत वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह आंकड़े भारत की स्थिर और मजबूत आर्थिक स्थिति को दर्शाते हैं। दास ने कहा कि भारत की ताकत केवल संकट झेलने में नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों में खुद को बदलने की क्षमता में है। व्यापक आर्थिक स्थिरता, लगातार नीतिगत फैसले, बुनियादी ढांचे का विकास और मजबूत घरेलू मांग ने इस मजबूती को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने महंगाई को नियंत्रित रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि बढ़ती कीमतों का सबसे अधिक असर गरीब वर्ग पर पड़ता है। महंगाई कम रहने से लोगों की क्रय शक्ति बढ़ती है और इससे समग्र आर्थिक स्थिरता को समर्थन मिलता है।
दास ने यह भी कहा कि संकट के समय भारत ने संतुलित नीतिगत कदम उठाए हैं। आवश्यकता पड़ने पर राजकोषीय और मौद्रिक उपाय लागू किए गए और समय पर उन्हें वापस भी लिया गया, जिससे व्यवस्था में असंतुलन नहीं पैदा हुआ। इसके अलावा उन्होंने अर्थव्यवस्था में हो रहे संरचनात्मक बदलावों पर भी प्रकाश डाला। तेजी से डिजिटलकरण, बुनियादी ढांचे का विस्तार और इलेक्ट्रॉनिक्स व अर्धचालक जैसे क्षेत्रों में वृद्धि ने भारत की आर्थिक दिशा को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत ने रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखते हुए विभिन्न देशों के साथ साझेदारी को विविध बनाया है, जिससे किसी एक देश पर निर्भरता कम हुई है।




