भारत फिर से सिरमौर बनने की दौड़ में है, इसने एक और मोर्चे पर चीन को पछाड़ दिया है। भारत इनवेस्टेबल मार्केट इंडेक्स में चीन से आगे निकल गया है। अधिक लोकप्रिय एमर्जिंग मार्केट इंडेक्स में भी भारत उससे आगे निकलने के करीब पहुंच गया है। भारत की इकॉनोमी दुनिया में सबसे तेज गति से दौड़ रही है और वह कई मामलों में चीन पर भारी पड़ता जा रही है। घरेलू शेयर बाजारों में तेजी के बीच भारत ने इनवेस्टेबल मार्केट इंडेक्स में चीन को पीछे छोड़ दिया है। मॉर्गन स्टेनली के मुताबिक गतदिनों भारत ने चीन को पीछे छोड़ते हुए इनवेस्टेबल मार्केट इंडेक्स में सबसे बड़ा वेटिंग बन गया है। साथ ही भारत इंडेक्स में चीन को पछाडऩे के बहुत करीब है। इनवेस्टेबल मार्केट इंडेक्स 24 उभरते बाजारों में बड़े, मध्यम और छोटे शेयरों को कवर करता है। 3,355 कंस्टीट्यूएंट्स के साथ यह इंडेक्स हर देश में फ्री फ्लोट-एडजस्टेड मार्केट कैप का करीब 99 फीसदी कवर करता है। पिछले महीने एमएससीआई सूचकांकों में फेरबदल के बाद एनालिस्ट्स ने अनुमान लगाया था कि भारतीय इक्विटी में लगभग 4 से 4.5 अरब डॉलर का निवेश हो सकता है। नुवामा ऑल्टरनेटिव एंड क्वांंटिटेटिव रिसर्च के अनुसार मौजूदा मोमेंटम को देखते हुए भारत साल के अंत तक इनवेस्टेबल मार्केट इंडेक्स में 22फीसदी वेटेज को पार कर सकता है। बढ़ते वेटेज से देश में विदेशी प्रवाह बढ़ेगा। लेकिन समस्या यह है कि घरेलू बाजार के प्रतिभागी उनसे अधिक बोली लगा रहे हैं। फंडामेंटल फैक्टर्स निश्चित रूप से भारत पर लागू होते हैं और ईएम में भारत की नई स्थिति चिंताजनक नहीं है। कई अन्य निवेशकों की तरह मॉर्गन स्टेनली का भी मानना है कि शेयरों में गिरावट से साइडलाइन पर पैसा आ सकता है। इससे इस तरह की गिरावट ज्यादा समय तक नहीं रहेगी। मॉर्गन स्टेनली के विश्लेषकों ने एक नोट में लिखा भी है कि भारत में शेयर मार्केट अभी पीक पर नहीं पहुंचा है और ईएम इंडेक्स में भारत के वेटेज को शिखर तक पहुंचने के लिए अभी कुछ और दूरी तय करनी पड़ सकती है। इस वर्ष में एमएससीआई ईएम इंडेक्स में सात फीसदी तक तेजी आई है, जबकि निफ्टी ने 15 फीसदी रिटर्न दिया है। दूसरी ओर चाइनीज इक्विटीज में 10 फीसदी ही तेजी आई है।

