Saturday, July 11, 2026 |
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Share Market में भारी उतार, Nifty 24,200 के नीचे, Sensex 900 अंक लुढ़का

by Business Remedies
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Sharp fall in Sensex and Nifty during stock market crash

23 April 2026 को शेयर बाजार में गिरावट का दबाव और गहरा हो गया और closing के समय stock market update में निवेशकों की तेज बिकवाली देखने को मिली। पूरे दिन बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा, लेकिन अंतिम घंटों में बिकवाली बढ़ने से nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे बंद हुआ। वहीं sensex भी लगभग 900 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ, जिससे बाजार का समग्र रुख कमजोर नजर आया। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी और वैश्विक संकेतों की कमजोरी ने निवेशकों की धारणा पर नकारात्मक असर डाला। कारोबार के दौरान कई प्रमुख शेयरों में दबाव देखने को मिला। nifty के सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में ट्रेंट लिमिटेड, महिंद्रा एंड महिंद्रा, श्रीराम फाइनेंस, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस और बजाज फिनसर्व शामिल रहे, जिनमें लगातार बिकवाली का दबाव बना रहा। इसके विपरीत कुछ शेयरों में मजबूती भी देखने को मिली, जहां डॉ रेड्डीज लैबोरेट्रीज, सिप्ला, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, अडानी एंटरप्राइजेज और अपोलो हॉस्पिटल्स ने बाजार को कुछ हद तक सहारा देने की कोशिश की।

सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो बाजार में मिश्रित रुख देखने को मिला। पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में लगभग 0.4 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जो इस बात का संकेत है कि इस क्षेत्र में निवेशकों की रुचि बनी हुई है। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र ने भी अच्छा प्रदर्शन किया और इसका सूचकांक लगभग 1.6 प्रतिशत बढ़ा। ऊर्जा क्षेत्र में 0.2 प्रतिशत की मामूली तेजी रही, जबकि मीडिया क्षेत्र में 1 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई। दूसरी ओर, ऑटो और पीएसयू बैंकिंग क्षेत्र में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट रही, जो बाजार पर भारी पड़ी। इसके अलावा उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु, सूचना प्रौद्योगिकी, रियल्टी, धातु और निजी बैंकिंग क्षेत्र में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे व्यापक बाजार पर दबाव बना रहा।

वृहद बाजार की बात करें तो मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। nifty मिडकैप सूचकांक लगभग 0.4 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ, जबकि स्मॉलकैप सूचकांक में 0.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि केवल बड़े शेयर ही नहीं बल्कि मध्यम और छोटे शेयरों में भी निवेशकों ने मुनाफावसूली की। विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है और कंपनियों की लागत में वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेत, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने भी बाजार की दिशा को प्रभावित किया है। आने वाले सत्रों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और विदेशी निवेशकों के रुख पर बनी रहेगी।



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