नई दिल्ली,
वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ती कीमतों के बीच सोने में निवेश का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। जहां एक ओर भौतिक सोना अपनी परंपरागत मांग बनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर डिजिटल माध्यम से निवेश करने वाले निवेशकों के बीच गोल्ड ईटीएफ तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, March 2026 तक गोल्ड ईटीएफ की कुल प्रबंधन अधीन परिसंपत्ति (एयूएम) बढ़कर 1,71,468.4 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो सालाना आधार पर लगभग तीन गुना वृद्धि दर्शाती है। आईसीआरए एनालिटिक्स के विश्लेषण के मुताबिक, यह आंकड़ा पिछले पांच वर्षों में 64.76 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर को दर्शाता है। March 2021 में यह एयूएम केवल 14,122.72 करोड़ रुपये था, जो अब कई गुना बढ़ चुका है।
सालाना आधार पर निवेश में तेज उछाल
March 2025 में 58,887.99 करोड़ रुपये के मुकाबले March 2026 में एयूएम में 191.18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि भारत में सोने से जुड़े निवेश में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है और निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। March 2026 में गोल्ड ईटीएफ में शुद्ध निवेश प्रवाह 2,265.68 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 77.21 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी। वहीं March 2021 में यह प्रवाह केवल 662.45 करोड़ रुपये था, जिससे साफ है कि समय के साथ निवेशकों की रुचि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हालांकि, महीने दर महीने आधार पर निवेश प्रवाह में कमी देखने को मिली है। February 2026 में 5,254.95 करोड़ रुपये के मुकाबले March में यह 56.88 प्रतिशत घट गया। इसका कारण सोने की कीमतों में अल्पकालिक गिरावट और वैश्विक जोखिम में अस्थायी कमी माना जा रहा है।
विशेषज्ञों की राय: सुरक्षित निवेश के रूप में बढ़ी मांग
आईसीआरए एनालिटिक्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अश्विनी कुमार के अनुसार, निवेशकों की बढ़ती रुचि के पीछे वैश्विक अस्थिरता और सोने के मजबूत प्रदर्शन का संयुक्त प्रभाव है। उन्होंने कहा कि हाल के समय में भूराजनैतिक तनाव और सोने की कीमतों में तेज वृद्धि के कारण निवेशकों ने इसे अपने निवेश पोर्टफोलियो में सुरक्षित विकल्प के रूप में अपनाया है। उन्होंने यह भी बताया कि सोना पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है और वर्तमान परिस्थितियों में इस भूमिका को और मजबूती मिली है। वर्तमान में बाजार में 26 गोल्ड ईटीएफ योजनाएं उपलब्ध हैं, जिनमें से 6 योजनाएं वित्त वर्ष 2025-26 में शुरू की गई हैं। इन योजनाओं में एक वर्ष का औसत प्रतिफल लगभग 58.81 प्रतिशत से 62.85 प्रतिशत के बीच रहा है, जबकि पांच वर्ष की अवधि में यह 25.78 प्रतिशत से 26.11 प्रतिशत के बीच है।
अल्पकालिक गिरावट के बावजूद भरोसा कायम
हालांकि हाल के महीनों में निवेश प्रवाह में कमी आई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों का भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है। सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद गोल्ड ईटीएफ में निवेश सकारात्मक बना हुआ है, जो दीर्घकालिक स्थिरता का संकेत देता है। अश्विनी कुमार ने बताया कि भौतिक सोना जहां उपभोग और सांस्कृतिक कारणों से खरीदा जाता है, वहीं गोल्ड ईटीएफ निवेश, विविधीकरण और रणनीतिक संपत्ति आवंटन के लिए अधिक उपयुक्त है। उन्होंने कहा कि वित्तीय निवेशकों के लिए गोल्ड ईटीएफ एक पारदर्शी और प्रभावी माध्यम प्रदान करते हैं, जिससे वे सोने की कीमतों में भागीदारी कर सकते हैं।




