नई दिल्ली: एक नई रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर उपलब्ध तेल भंडार, जिनका उपयोग सप्लाई चेन को बिना प्रभावित किए किया जा सकता है, जून मध्य तक काफी कम हो सकते हैं। इससे बाजार में “Operational Stress” की स्थिति पैदा होने का खतरा बढ़ रहा है।
Investment Bank जे.पी. मॉर्गन की रिपोर्ट में बताया गया है कि 2026 की शुरुआत में दुनिया भर में कुल तेल भंडार लगभग 8.4 अरब बैरल था, लेकिन इसमें से बहुत कम हिस्सा ही ऐसा है जिसे बिना सिस्टम पर दबाव डाले उपयोग किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार इन 8.4 अरब बैरल में से केवल 0.8 अरब बैरल ही वास्तव में उपयोग के लिए उपलब्ध हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अब तक लगभग 28करोड़ बैरल तेल का उपयोग किया जा चुका है, जिससे करीब 58करोड़ बैरल उपयोग योग्य भंडार बचा है। मौजूदा खपत दर को देखते हुए यह भंडार जून की शुरुआत तक समाप्त हो सकता है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और Strait Of Hormuz में सप्लाई बाधाओं के कारण तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि समस्या तेल के पूरी तरह खत्म होने की नहीं है, बल्कि उपलब्ध और आसानी से उपयोग किए जा सकने वाले भंडार की कमी की है, जिससे सप्लाई नेटवर्क का सुचारू संचालन प्रभावित हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, सिस्टम तब फेल होता है जब सप्लाई नेटवर्क में पर्याप्त कार्यशील मात्रा नहीं बचती, न कि तब जब तेल पूरी तरह समाप्त हो जाता है। कई भंडार पाइपलाइन जरूरतों, न्यूनतम टैंक स्तर और अन्य संचालन संबंधी आवश्यकताओं में बंधे रहते हैं, जिससे बाजार के लिए उपलब्ध मात्रा सीमित हो जाती है। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 2.30प्रतिशत गिरकर 107.33डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चा तेल 3.08प्रतिशत गिरकर 99.12डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका “Project Freedom” को अस्थायी रूप से रोक देगा। यह एक सैन्य पहल थी जिसका उद्देश्य Strait Of Hormuz से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि यह निर्णय ईरान के साथ चल रही वार्ताओं में प्रगति के बाद लिया गया है, जिससे अंतिम समझौते की संभावना बढ़ी है।

