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अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन प्लांट्स टू पेशेंट्स श्रृंखला 4 – ‘Ethnopharmacology Beyond Times’ के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य का नया अध्याय आरम्भ!

शोध और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित चिकित्सा विज्ञान और वैदिक सनातन ज्ञान का संगम ही भविष्य की चिकित्सा पद्धति की दिशा सुनिश्चित कर सकता है - स्वामी रामदेव

by Business Remedies
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शोध और साइंटिफिक वैलिडेशन के साथ ही पारम्परिक औषधियों को विश्व के समक्ष प्रस्तुत करने का समय आ गया है – आचार्य बालकृष्ण

हरिद्वार, 25 फरवरी 2026 : पतंजलि अनुसन्धान संस्थान और पतंजलि विश्विद्यालय के तत्वधान में आज 2 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन Plants to Patients Series 4 – Ethnopharmacology Beyond Times पूर्ण हुआ। इस सम्मेलन के माध्यम से विश्व को यह स्पष्ट संदेश प्रदान किया गया कि पारंपरिक उपचार पद्धतियाँ केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि वैज्ञानिक परीक्षण और प्रमाण के माध्यम से भविष्य की वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था का सशक्त आधार बन सकती हैं।

इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पेरूजिया विश्वविद्यालय, इटली और इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर एथनोफार्माकोलोजी के प्रेजिडेंट, प्रोफेसर डोमेनिको विटोरियो डेलफिनो, कोट द’अज़ूर विश्वविद्यालय, फ्रांस से प्रोफेसर लुई-फेलिक्स नॉटियस, ग्राज विश्विद्यालय, आस्ट्रिया से प्रोफेसर रुडोल्फ बाउर, नीदरलैंड्स से एल्सेवियर प्रकाशन की सीनियर पब्लिशर, प्रोफेसर ऐन मैरी शोनी-पोरडॉन, माए फ़ा लुआंग विश्विद्यालय, थाईलैंड से प्रोफेसर तिडारैट डुआंग्योट, सोसाइटी फॉर एथनोफार्माकोलोजी के संस्थापक पुलक के. मुखर्जी, AIIMS, कल्याणी से प्रोफेसर वाई. के. गुप्ता, AIIMS, ऋषिकेश की Director प्रोफेसर मीनू सिंह और उनके साथ प्रोफेसर पुनीत धामिजा, AIIMS, नई दिल्ली से प्रोफेसर (मेजर) एम. डी. रे, टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल (ACTREC), मुंबई से प्रोफेसर विक्रम गोटा, एवं NIPER , Mohali से प्रोफेसर संजय जाचक, आदि देश-विदेश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और चिकित्सा विशेषज्ञों ने भाग लेकर आयुर्वेद, आधुनिक विज्ञान और चिकित्सा के समन्वय पर गहन मंथन किया।

इस अवसर पर योगऋषि स्वामी रामदेव ने इस सम्मेलन में उपस्थित गणमान्य अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि शोध और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित चिकित्सा विज्ञान और वैदिक सनातन ज्ञान का संगम ही भविष्य की चिकित्सा पद्धति की दिशा सुनिश्चित कर सकता है। हजारों वर्षों से संरक्षित भारतीय चिकित्सा ज्ञान को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ प्रस्तुत करना समय की आवश्यकता है और पतंजलि एक वैश्विक केंद्र के रूप में प्रमाण-आधारित भारतीय चिकित्सा को विश्वसनीयता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि विश्वभर में आयुर्वेद और सिद्ध चिकित्सा पद्धति के साथ ही यूनानी, मिस्र, ग्रीक, तिब्बती, चीनी, जापानी, कोरियाई चिकित्सा पद्धति विद्यमान है, आवश्यकता है इन चिकित्सा पद्धतियों को शोध और साइंटिफिक वैलिडेशन के साथ विश्व के समक्ष प्रस्तुत करने की, जिससे एक होलिस्टिक और प्रिवेंटिव हेल्थ केयर मॉडल और ग्लोबल हेल्थ का एक सशक्त माध्यम बन सके जिससे जनमानस को रोगों के लिए एक सुगम, सुरक्षित, सुलभ समाधान मिले।

सम्मेलन में प्रख्यात नैदानिक वैज्ञानिक डॉ. वाई. के. गुप्ता ने ज्ञान के आयामों को अत्यंत सरल शब्दों में प्रस्तुत करते हुए कहा कि कहा कि वास्तविक शोध वहीं से प्रारंभ होता है जहां स्वीकार किया जाता है कि अभी बहुत कुछ अज्ञात है। यही दृष्टिकोण एविडेंस-बेस्ड आयुर्वेद की आधारशिला है। स्वामी जी एवं आचार्य जी के मार्गदर्शन में आयुर्वेद को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित करने की दिशा में पतंजलि द्वारा निरंतर कार्य किया जा रहा है। पतंजलि का यह दृष्टिकोण केवल परंपरागत ज्ञान को संरक्षित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे आधुनिक शोध पद्धतियों के माध्यम से प्रमाणित कर वैश्विक चिकित्सा मंच पर स्थापित करने का प्रयास है।

पतंजलि के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. अनुराग वार्ष्णेय ने इस अवसर पर कहा कि पतंजलि आयुर्वेद, आधुनिक विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के समन्वय की दिशा में कार्यरत है। यह त्रिकोणीय मॉडल भविष्य की औषधि खोज का सशक्त माध्यम बन सकता है, जहाँ पारंपरिक ज्ञान प्रारंभिक संकेतों को आधार बना कर आधुनिक प्रयोगशालाओं के माध्यम से उन्हें प्रमाणित किया जा सकता है, एवं पतंजलि उसके लिए कार्यरत है।

International Conference P2P4 – Ethnopharmacology Beyond Times ने यह संदेश दिया कि जब प्राचीन ज्ञान को आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर परखा जाता है, तब वह और अधिक सशक्त होकर उभरता है। पतंजलि के प्रयास इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं, जो आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक प्रतिष्ठा दिलाने की दिशा में निरंतर अग्रसर हैं। यह सम्मेलन केवल विचारों का आदान-प्रदान नहीं, अपितु भविष्य की स्वास्थ्य क्रांति का प्रारंभिक उद्घोष है, जहां ‘प्लांट्स टू पेशेंट्स’ की अवधारणा वास्तव में साकार हो रही है।



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