भारत और मलेशिया के बीच हुए गत दिनों हुए समझौतों से भारतीय व्यापार को फायदा होने की पूरी उम्मीद है। जहां कृषि तकनीक और पैदावार बढ़ाने के तरीकों को साझा करने, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। इससे भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनने में मदद मिलेगी। भारत और मलेशिया के बीच हुए ऐतिहासिक समझौतों का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर से अधिक ले जाना और डॉलर की निर्भरता कम कर स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देना है। सेमीकंडक्टर, रक्षा और डिजिटल भुगतान जैसे 11 प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग से भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे। वहीं रुपया और रिंगिट में कारोबार होने से करेंसी एक्सचेंज का जोखिम कम होगा और लेनदेन लागत घटेगी। भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए मलेशिया के साथ ज्वाइंट वेंचर और तकनीक साझा की जाएगी। ताड़ के तेल की निर्बाध आपूर्ति के साथ कृषि उत्पादों के लिए बाजार तक बेहतर पहुंच और गैर-शुल्कीय बाधाओं को दूर करने पर भी सहमति बनी है। यूपीआई और अन्य डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार से भारतीय फिनटेक कंपनियों को मलेशिया में अपना कारोबार बढ़ाने का मौका मिलेगा। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड जैसे भारतीय रक्षा फर्मों के लिए मलेशिया में नए अवसर बढ़ेंगे। जहां स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक और बैंक नेगारा मलेशिया का सहयोग रहेगा। सीमा पार आतंकवाद और कट्टरपंथ को रोकने के लिए सख्त सुरक्षा समझौता भी किया गया है। दोनों देशों के बीच ग्रीन हाइड्रोजन और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग रहेगा। इससे आने वाले समय में भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से गति पकड़ सकेगी।

