इसी माह भारत-अमेरिका अंतरिम समझौते से भारतीय निर्यातकों को काफी फायदा होने वाला है। यह अमेरिकी बाजार में शुल्क-मुक्त या कम शुल्क पहुंच के साथ निर्यात बढ़ाने का एक प्रमुख अवसर है, जिससे रोजगार सृजन की संभावना है। हालांकि अमेरिका से पशु चारा और कुछ कृषि उत्पादों के आयात से सोयाबीन जैसे तिलहन किसानों को घरेलू बाजार में कीमतों के दबाव का सामना करना पड़ सकता है। जहां एक तरफ भारतीय मसालों, चाय, कॉफी, काजू, नारियल और कुछ फलों आम, अमरूद, पपीता, केला को अमेरिका में शून्य शुल्क के साथ निर्यात करने का अवसर मिल सकेगा। वहीं 1.36 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के भारतीय निर्यात पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा। उच्च स्तरीय प्रौद्योगिकी, एआई हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा। भारतीय कृषि निर्यात को अमेरिका में 50 फीसदी तक कम शुल्क का लाभ मिलेगा, जिससे प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी। अमेरिका से प्रोटीन युक्त के आयात से घरेलू सोयाबीन और तिलहन की कीमतों में कमी आ सकती है, जिससे सोयाबीन और मूंगफली किसानों को थोड़ा बहुत घाटा हो सकता है। वहीं भारत ने जीएम मक्का और सोयाबीन के प्रवेश पर अपना कड़ा रुख बरकरार रखा है, जो किसानों के लिए एक सुरक्षात्मक कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि यह अंतरिम समझौता कृषि सुरक्षा और निर्यात के बीच एक सावधानीपूर्वक संतुलित कदम के रूप में प्रस्तुत किया है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए निर्यात को बढ़ावा देना है, लेकिन पशु चारा जैसे विशिष्ट उत्पादों के आयात पर नजर रखना आवश्यक होगा।

