बिजनेस रेमेडीज/मुंबई (आईएएनएस)। भारत और फ्रांस ने मंगलवार को अपनी दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी को एक नया आयाम देते हुए द्विपक्षीय संबंधों को ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ में अपग्रेड करने की घोषणा की। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच उच्च स्तरीय वार्ता के दौरान लिया गया।
संयुक्त प्रेस वार्ता में दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह उन्नयन केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि रक्षा, नवाचार, व्यापार, प्रौद्योगिकी और जन-से-जन संपर्क जैसे क्षेत्रों में गहरे और संरचित सहयोग का संकेत है। दोनों नेताओं ने इस साझेदारी को वैश्विक स्थिरता और प्रगति के लिए एक सशक्त स्तंभ बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने मुंबई में राष्ट्रपति मैक्रों का स्वागत करते हुए कहा कि दोनों लोकतंत्रों के संबंध आपसी विश्वास, साझा मूल्यों और वैश्विक दृष्टिकोण पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि फ्रांस भारत के सबसे पुराने रणनीतिक साझेदारों में से एक रहा है और अब दोनों देश इस संबंध को पारंपरिक कूटनीति से आगे ले जाकर वैश्विक शांति, समृद्धि और तकनीकी प्रगति के नए आयामों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इस यात्रा की प्रमुख उपलब्धियों में से एक कर्नाटक के वेमगल में एच125 हेलिकॉप्टर की लाइन असेंबली सुविधा का उद्घाटन रहा। यह हेलिकॉप्टर लाइन वैश्विक एयरोस्पेस कंपनी Airbus के एच125 मॉडल के निर्माण पर केंद्रित होगी। यह हेलिकॉप्टर अत्यधिक ऊंचाई और कठिन परिस्थितियों में संचालन के लिए जाना जाता है। इस सुविधा के माध्यम से भारत न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक निर्यात बाजार में भी अपनी उपस्थिति मजबूत करेगा।
इस परियोजना से भारतीय युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के अवसर सृजित होंगे। साथ ही, एमएसएमई इकाइयों को वैश्विक सप्लाई चेन में शामिल होने का अवसर मिलेगा, जिससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को गति मिलेगी।
रक्षा सहयोग के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई। दोनों देशों ने अपने रक्षा सहयोग समझौते को अपग्रेड करते हुए उन्नत रक्षा प्लेटफॉर्म्स के सह-डिजाइन, सह-विकास और सह-उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसी क्रम में भारत की भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और फ्रांस की Safran के बीच संयुक्त उद्यम स्थापित करने पर सहमति बनी है।
इस पहल से भारत के घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूती मिलेगी, आयात पर निर्भरता घटेगी और उच्च-सटीक रक्षा प्रणालियों तक पहुंच सुलभ होगी।
दोनों नेताओं ने वार्षिक विदेश मंत्रियों के संवाद तंत्र की स्थापना पर भी सहमति व्यक्त की, जिसके माध्यम से ‘रोडमैप होराइजन 2047’ के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा की जाएगी। इस तंत्र के जरिए शिक्षा, संस्कृति, कौशल विकास और युवा गतिशीलता जैसे क्षेत्रों में सहयोग को संस्थागत रूप दिया जाएगा, ताकि साझेदारी के लाभ दोनों देशों की युवा पीढ़ी तक पहुंच सकें।
साथ ही, वर्ष 2026 को भारत-फ्रांस ‘इनोवेशन वर्ष’ के रूप में घोषित किया गया। इस अवसर पर इंडिया-फ्रांस इनोवेशन नेटवर्क की शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य व्यवसायों, स्टार्टअप्स, इनक्यूबेटर्स, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग जगत के नेताओं को एक साझा मंच पर लाना है।
प्रौद्योगिकी सहयोग के तहत महत्वपूर्ण खनिज, जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत सामग्रियों के क्षेत्रों में साझेदारी को भी आगे बढ़ाने की घोषणा की गई। यह पहल दोनों देशों को भविष्य की रणनीतिक और तकनीकी चुनौतियों का संयुक्त रूप से सामना करने के लिए सशक्त आधार प्रदान करेगी।

