Saturday, July 18, 2026 |
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मुक्त व्यापार समझौते भारत की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति का हिस्सा

by Business Remedies
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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की अर्थव्यवस्था गति देने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। इसके लिए उन्होंने पिछले दिनों ही ग्यारह देशों की यात्रा कर व्यापारिक समझौते को अमली जामा पहनाया भी है। पिछले साढ़े तीन साल में भारत ने नौ एफटीए साइन किए हैं, जिनमें से 5 पिछले 12 महीनों में हुए हैं। इनमें से 6 अब तक लागू हो चुके हैं। यह कहा जा सकता है कि पीएम नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से किए गए मुक्त व्यापार समझौते भारत की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति का हिस्सा हैं। इनसे निर्यात बढऩे, विदेशी निवेश आने, कुछ क्षेत्रों में रोजगार बढऩे और भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में हिस्सेदारी मजबूत होने की संभावना है। पर इनका पूरा लाभ कई वर्षों में सामने आएगा। यदि भारत घरेलू सुधार, बुनियादी ढांचे, विनिर्माण और कौशल विकास पर भी समान गति से काम करता रहा, तो ये समझौते अर्थव्यवस्था की विकास दर को सहारा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वैसे माना जाए तो इन देशों से किए गए समझौतों से दूसरे देश भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क (टैरिफ) घटाते या खत्म करते हैं, तो भारतीय सामान वहां सस्ता और अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएगा। टेक्सटाइल और गारमेंट, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, ऑटो पार्ट्स
जेम्स एंड ज्वेलरी, समुद्री उत्पाद, आईटी और प्रोफेशनल सेवाएं बेहतर तरीके से भारत को उपलब्ध हो सकेगी। वहीं समझौते के तहत सदस्य देशों ने अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश लक्ष्य का ढांचा स्वीकार किया है। यदि यह निवेश अपेक्षित स्तर तक आता है, तो इससे
नई फैक्ट्रियां लगेंगी, रोजगार बढ़ेंगे, नई तकनीक आएगी और निर्यात क्षमता मजबूत होगी। इसके अलावा रोजगार सबसे अधिक कपड़ा उद्योग, चमड़ा, फूड प्रोसेसिंग, इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स और आईटी सेवाओं में बढ़ सकता है। यूके के साथ समझौते में केवल सामान का व्यापार ही नहीं, बल्कि सेवाओं और पेशेवरों की आवाजाही को भी आसान बनाने के प्रावधान हैं। हालांकि इसका फायदा भारत को तुरंत नहीं होगा, बल्कि 3 से 10 वर्षों में दिखाई देगा। अकेले एफटीए से अर्थव्यवस्था में बड़ा उछाल नहीं आता, यह तभी उठता है जब उद्योग प्रतिस्पर्धी हों, निवेश बढ़े और निर्यात करने वाली कंपनियां इन अवसरों का लाभ उठाएं।



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