इस विश्व स्वास्थ्य दिवस पर थीम ‘स्वस्थ शुरुआतें, आशावान भविष्य’ हमें यह समयानुकूल याद दिलाती है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और आर्थिक प्रगति एक-दूसरे के पूरक हैं। भारत जैसे युवा और तेजी से बढ़ते देश के लिए जीवन के शुरुआती चरणों से ही मजबूत स्वास्थ्य नींव बनाना केवल एक सामाजिक आवश्यकता नहीं है- यह एक आर्थिक रणनीति भी है।
भारत की आधे से अधिक जनसंख्या 30 वर्ष से कम उम्र की है। ऐसे में यह जनसांख्यिकीय लाभ तभी सतत विकास में बदला जा सकता है, जब इसके नागरिक शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हों। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र, जिसकी अनुमानित वैल्यू 2025 तक 638 अरब डॉलर तक पहुँचने की है, अब केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है, यह वेलनेस टेक्नोलॉजी, निवारक देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और स्वास्थ्य केंद्रित स्टार्टअप्स तक विस्तृत हो रहा है, यह व्यवसायों के लिए एक सशक्त अवसर प्रस्तुत करता है, कर्मचारियों की भलाई, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, और पारिवारिक हितैषी नीतियों में निवेश केवल उत्तरदायी नेतृत्व नहीं है, यह एक समझदारी भरा व्यावसायिक निर्णय भी है। स्वस्थ टीमें अधिक उत्पादक, नवोन्मेषी और जुड़ी हुई होती हैं।
साथ ही, सार्वजनिक-निजी भागीदारी को ग्रामीण क्लीनिकों से लेकर शहरी वेलनेस हब तक समावेशी, तकनीक-सक्षम स्वास्थ्य सेवा की पहुंच को बढ़ावा देते रहना चाहिए।
जब हम विश्व स्वास्थ्य दिवस मना रहे हैं, तो आइए स्वास्थ्य को खर्च नहीं, बल्कि पूंजी के रूप में देखें। क्योंकि जब हम स्वस्थ शुरुआतों की नींव रखते हैं, तो हम केवल आशावान भविष्य नहीं गढ़ते, बल्कि एक स्वस्थ, सशक्त भारत का निर्माण करते हैं।

