Wednesday, July 8, 2026 |
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मौसम का बदलता मिजाज खेती और किसानों के लिए बना चुनौती

by Business Remedies
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भारत में पिछले काफी समय से मौसम चक्र गड़बड़ा रहा है। मौसम में होता यह बदलाव मानव जीवन के लिए घातक नहीं बन जाए, इसके लिए हम सभी को निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए। मौसम का बदलता मिजाज आज खेती और किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। यह केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक समस्या भी है। यदि समय रहते इसके समाधान नहीं निकाले गए, तो इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। इसलिए जरूरी है कि सरकार, वैज्ञानिक और किसान मिलकर इस समस्या का समाधान खोजें और टिकाऊ खेती की दिशा में कदम बढ़ाएं। जहां पेड़-पौधे प्राकृतिक संतुलन बनाए रखते हैं। पर तेजी से हो रही कटाई के कारण वर्षा चक्र प्रभावित हो रहा है, जिससे अनियमित बारिश देखने को मिल रही है। औद्योगिक विकास और वाहनों से निकलने वाला धुआं वातावरण को प्रदूषित कर रहा है, जिससे मौसम के पैटर्न बदल रहे हैं। वहीं शहरों के विस्तार ने भूमि उपयोग को बदल दिया है। इससे मौसम भी प्रभावित हो रहा है। अनियमित बारिश और तापमान में बदलाव से फसलों की पैदावार कम हो रही है। गेहूं, धान, दालें सब पर इसका असर देखा जा रहा है। भारत में करीब 60 फीसदी लोग अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं। वर्तमान में भारत सहित संपूर्ण विश्व जलवायु परिवर्तन की समस्या से जूझ रहा है। पर्यावरण में अनेक परिवर्तन हो रहे हैं। कभी बारिश तो कभी ओलावृष्टि, कभी तापमान में बढ़ोत्तरी, वर्षा की कमी, हवाओं की दिशा में परितर्वन आदि प्रभाव दृष्टिगोचर हो रहे हैं। जलवायु परिवर्तन प्राकृतिक एवं मानवीय दोनों कारणों से हो रहा है, जिसमें मानवीय कारणों का अधिक योगदान है। जहां एक तरफ ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन यथा कार्बनडाई आक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, सल्फरडाई ऑक्साइड आदि के उत्सर्जन में वृद्धि पृथ्वी के औसत तापमान में बढ़ोतरी का एक प्रमुख कारण है। वहीं भूमि उपयोग में परिवर्तन भी इसके लिए जिम्मेदार है यथा इससे सतह के एल्बीडो में वृद्धि हुई है।



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