— 20% से आगे जाने की दिशा में सरकार बढ़ा रही कदम
— इथेनॉल का उत्पादन बढ़ाने के लिए चीनी निर्यात पर लगानी होगी पाबंदी
नई दिल्ली। देश में स्वच्छ ईंधन और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में केंद्र सरकार अब पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। वर्तमान में देशभर में E20 (20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) लागू किया जा चुका है और अब नीति स्तर पर इसे और बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।
भारत का इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम दुनिया के सबसे तेज बढ़ते बायोफ्यूल कार्यक्रमों में शामिल हो चुका है। अब सरकार 20% से आगे बढ़ने की दिशा में प्रयोग कर रही है, लेकिन इसके साथ कृषि, वाहन तकनीक और ईंधन गुणवत्ता से जुड़ी चुनौतियों को संतुलित करना भी जरूरी होगा। इथेनॉल का उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार को चीनी के निर्यात पर पाबंदी लगानी होगी।
वर्तमान स्थिति
भारत ने वर्ष 2025 में पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया है, जो मूल लक्ष्य (2030) से करीब 5 साल पहले पूरा हुआ। 2014 में यह मिश्रण मात्र 1.5% था, जो 2025 में बढ़कर 20% हो गया। जुलाई 2025 तक औसत ब्लेंडिंग लगभग 19.05% और अधिकतम 19.93% दर्ज की गई।
सरकार के इस कार्यक्रम से अब तक
1. करीब ₹1.44 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा की बचत हुई
2. किसानों को ₹1.25 लाख करोड़ से अधिक का भुगतान मिला
3. लगभग 736 लाख टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आई
अब लक्ष्य 20% से आगे
नीति विशेषज्ञों और सरकार के स्तर पर अब E20 से आगे बढ़कर E25 और E30 (25%–30% इथेनॉल मिश्रण) पर काम शुरू हो चुका है। कुछ प्रस्तावों में इसे 27% तक बढ़ाने की भी चर्चा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीनी के दाम बढ़ेंगे
भारत को 2022-23 के सीजन में चीनी की कमी का सामना करना पड़ा था। इसी वजह से सरकार ने चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी थी। इसके बाद 2023-24 में भले ही उत्पादन ज्यादा हुआ, लेकिन फिर भी सरकार ने चीनी को बाहर भेजने की अनुमति नहीं दी, ताकि देश में पर्याप्त स्टॉक बना रहे। 2024-25 में सरकार ने सीमित मात्रा में चीनी निर्यात की अनुमति दी। तय सीमा में से करीब 9 लाख टन चीनी विदेश भेजी गई। वहीं, चालू सीजन (अक्टूबर से सितंबर) में सरकार ने अब तक 15.9 लाख टन निर्यात की अनुमति दी है, जिसमें से मार्च के अंत तक करीब 3.6 लाख टन चीनी का निर्यात हो चुका है।
उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, सरकार गन्ना किसानों के बकाया भुगतान को लेकर चिंतित है। मार्च के अंत तक मौजूदा पेराई सीजन में मिलों को किसानों को करीब 16,918 करोड़ रुपए देना बाकी है। यह पेराई सीजन 1 अक्टूबर 2025 से शुरू हुआ था। हालांकि, मिलों ने कुल बकाया 1.07 लाख करोड़ रुपए में से लगभग 84 फीसदी भुगतान कर दिया है, लेकिन फिर भी जो रकम बची है। वह काफी बड़ी है और चिंता का कारण बनी हुई है। एक अधिकारी के अनुसार, अगर चीनी मिलें इथेनॉल का उत्पादन और बढ़ाती हैं, तो उनकी कमाई बढ़ सकती है और वे किसानों का बकाया जल्दी चुका सकती हैं।
इस साल चीनी की कीमत!
बीएमआई की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 की शुरुआत (जनवरी से मार्च) में दुनियाभर में चीनी की औसत कीमत करीब 14.6 सेंट प्रति पाउंड रही। अब आगे के महीनों में चीनी के दाम धीरे-धीरे बढ़ने की उम्मीद है, जिसमें अप्रैल से जून तक करीब 16.2 सेंट प्रति पाउंड, जुलाई से सितंबर तक करीब 16.6 सेंट प्रति पाउंड और अक्टूबर से दिसंबर तक करीब 17.2 सेंट प्रति पाउंड रहने की उम्मीद है। पूरे साल 2026 में औसतन चीनी की कीमत 16.2 सेंट प्रति पाउंड रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अल नीनो का असर भारत में चीनी उत्पादन पर पड़ सकता है। पहले भी ऐसा हो चुका है। साल 2023 में मॉनसून की बारिश करीब 6 फीसदी कम रही थी, जिसका असर अगले सीजन (2024-25) में दिखा।
– सरकार का यह मानना है कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से कोई दिक्कत नहीं आती है, लेकिन अगर पानी की एक बूंद भी इसमें मिल जाए तो इसके दुष्प्रभाव सामने आ सकते हैं। गाड़ी बंद हो सकती है। सरकार का सोचना सही हो सकता है, क्योंकि अमरीका-ईरान युद्ध के चलते तेल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। ऐसे में सरकार वैकल्पिक इंतजाम कर रही है।
– लादु सिंह, अध्यक्ष, राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन, जयपुर जिला

