मिडिल ईस्ट तनाव का असर अब भारत के आम लोगों की रसोई तक पहुंचने लगा है। खाद्य तेलों की कीमतें तेजी से बढऩे लगी हैं। भारत में क्रूड ऑयल की आपूर्ति बाधित होने से ईंधन, माल ढुलाई और खाद्य तेल की कीमतों में भारी उछाल आ गया है। रसोई में तेल, दाल, सूखे मेवे और पैकेज्ड फूड के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। वर्तमान में तेल और सीएनजी की कीमतों में वृद्धि का असर पहले ही दिखने लगा है। पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल का बड़ा हिस्सा भारत आयात करता है। युद्ध के कारण आपूर्ति प्रभावित होने से दामों में बढ़ोतरी होना स्वाभाविक है। पाम ऑयल 5 फीसदी, सनफ्लावर ऑयल 16 फीसदी तक बढ़ चुका है। वहीं यूरिया 35 फीसदी तक बढ़ चुका है। इसके अलावा एलपीजी गैस के 60 रुपए प्रति सिलेंडर पहले से ही बढ़ चुके हैं। युद्ध और लंबा चला तो पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं, लेकिन फिलहाल स्थिर हैं। वहीं ईरान और अफगानिस्तान से सप्लाई प्रभावित होने के कारण बादाम, खजूर और पिस्ता की कीमतें बढ़ी हैं। इसके अलावा फलों, सब्जियों और ऑनलाइन फूड डिलीवरी महंगी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में शिपिंग के रास्ते बंद होने या महंगे होने से दालें और अनाज के दाम भी बढ़ सकते हैं। वहीं उर्वरकों यूरिया, पोटाश की सप्लाई रुकने से खेती की लागत बढ़ेगी, जिससे खाद्य उत्पादन महंगा हो जाएगा। रोजमर्रा की चीजें जैसे टीवी, फ्रीज, कूलर इस वर्ष गर्मियों में लोगों को महंगाई का तडक़ा लगाएगा, क्योंकि तार और प्लास्टिक महंगी होने से यह सब महंगे हो जाएंगे। ट्रांसपोर्टेशन की कमी से सप्लाई चेन टूटने की संभावना बनी हुई, जिससे महंगाई और भी ज्यादा बढ़ सकती है।

