भारत का एविएशन सेक्टर पिछले पांच वर्षों में तेजी से बढ़ रहा है। इसमें कई महत्वपूर्ण विकास हुए हैं। वर्ष, 2014 में देश में केवल 74 एयरपोर्ट थे, जो अब बढक़र 163 हो गए हैं। सरकार का लक्ष्य 2047 तक 350 एयरपोर्ट्स बनाने का है। वहीं हवाई यात्रियों की संख्या वर्ष, 2014 में 60 मिलियन से बढक़र वर्ष, 2023 में 143 मिलियन हो गई है।
अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या 43 मिलियन से बढक़र 64 मिलियन हो गई है। उड़ान योजना के तहत 475 आरसीएस मार्गों पर आवागमन शुरू हो गया है। वर्ष, 2026 तक 3300 नए विमानों की जरूरत होगी। हवाई यात्रियों की संख्या में सालाना 7 फीसदी की वृद्धि होने की उम्मीद है। बुनियादी ढांचे के विकास में 96 हजार करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया गया। क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के तहत 600 से अधिक नए मार्ग शुरू किए गए, जिससे छोटे शहरों को जोड़ा गया। घरेलू हवाई यात्री संख्या में भारी उछाल आया है, जिससे भारत अमेरिका और चीन के बाद तीसरा सबसे बड़ा बाजार बन गया है। एयर इंडिया और इंडिगो जैसी प्रमुख एयरलाइनों ने रिकॉर्ड विमान ऑर्डर देकर एयरलाइन क्षमता को बढ़ाया है। वहीं भारत के एक प्रमुख वैश्विक एमआरओ हब के रूप में विकसित होने की संभावना है, जिसका राजस्व 2028 तक तीन गुना होने की उम्मीद है।
आगामी वर्षों में 35 हजार करोड़ रुपए से अधिक का अतिरिक्त निवेश एयरपोर्ट बुनियादी ढांचे में संभावित है।एयर कार्गो क्षेत्र में सालाना 7 फीसदी की वृद्धि की उम्मीद है, जो ई-कॉमर्स गतिविधियों को बढ़ावा देगा। मध्यम वर्ग की बढ़ती आय के कारण घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि रहने की उम्मीद है। जहां एक ओर विमानन टरबाइन ईंधन की उच्च लागत एयरलाइनों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इससे निजात पाने के लिए भी केंद्र सरकार निरंतर प्रयासरत है।

