भारत की स्वतंत्रता, संप्रभुता और पहचान के प्रतीक के रूप में आज राष्ट्रीय ध्वज दिवस मनाया जाएगा। हरेक भारतवासी को अपने राष्ट्रीय ध्वज पर गर्व होना चाहिए। यह दिन उस ऐतिहासिक अवसर की स्मृति में मनाया जाता है, जब 22 जुलाई,1947 को भारत की संविधान सभा ने वर्तमान तिरंगे राष्ट्रीय ध्वज को स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया था। वर्तमान ध्वज का स्वरूप स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया की ओर से प्रस्तावित ध्वज पर आधारित है। स्वतंत्र भारत के ध्वज में चरखे के स्थान पर 24 तीलियों वाला अशोक चक्र रखा गया, जो धर्म, न्याय और निरंतर प्रगति का प्रतीक है। भारतीय तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि राष्ट्र की पहचान, एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है। केसरिया रंग-साहस, त्याग और बलिदान, सफेद रंग-सत्य, शांति और पारदर्शिता, हरा रंग-समृद्धि, विकास और प्रकृति और अशोक चक्र (24 तीलियां)-न्याय, धर्म, सतत प्रगति और कर्मशीलता का प्रतीक है। यह दिवस भारत की स्वतंत्रता के लिए लडऩे वाले स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों को सम्मानित करता है। यह राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है, जो विविध संस्कृतियों, धर्मों और भाषाओं के लोगों को एक साथ लाता है। यह राष्ट्र के प्रति गर्व और सम्मान को प्रोत्साहित करके देशभक्ति को मजबूत करता है। यह दिवस भारत की संप्रभुता, स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है। यह न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के संवैधानिक आदर्शों को बढ़ावा देता है। इस दिन नागरिकों को राष्ट्र की एकता, अखंडता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करने का संदेश दिया जाता है।

