जुलाई माह में बारिश ना के बराबर होने से किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ झलक रही है। जुलाई में मानसून सामान्य से काफी कम है और अगस्त में भी बारिश ना के बराबर हो, तो इसका असर सबसे पहले खरीफ फसलों पर पड़ेगा। हालांकि, महंगाई कितनी बढ़ेगी यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि सिंचाई, सरकारी भंडार, आयात और नीति-हस्तक्षेप कितने प्रभावी रहते हैं? राजस्थान सहित कई राज्यों में कम बारिश से जिन फसलों को सबसे अधिक नुकसान का खतरा होता है, उनमें सोयाबीन-मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में वर्षा पर काफी निर्भर है। कम बारिश से उत्पादन में बड़ी गिरावट आ सकती है। वहीं धान-पूर्वी राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के वर्षा-आधारित क्षेत्रों में रोपाई और पैदावार प्रभावित हो सकती है। बारिश कम होने से मंडियों में अनाज, दालों, और तिलहन की आवक घटेगी। इसके परिणामस्वरूप आम आदमी की थाली बहुत महंगी हो जाएगी। इसके अलावा मवेशियों के लिए चारे की गंभीर समस्या पैदा हो सकती है, जिससे दूध, घी और अन्य डेयरी उत्पादों की कीमतों में भारी उछाल आएगा। किसानों की आय घटने से उनकी क्रय क्षमता प्रभावित होगी, जिससे मंडियों और स्थानीय व्यापारियों के कारोबार में मंदी आ जाएगी। यदि अगस्त में भी व्यापक स्तर पर वर्षा नहीं होती और सूखे जैसी स्थिति बनती है, तो खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी होने की पूरी संभावना है।

