कार्तिक पूर्णिमा, देव दिवाली और गुरुनानक जयंती तीनों का आज संगम है। कार्तिक पूर्णिमा हिंदू कैलेंडर के कार्तिक महीने में आने वाली पूर्णिमा है, जो आमतौर पर नवंबर या दिसंबर में ही आती है। यह पर्व भगवान विष्णु और भगवान बुद्ध की पूजा के लिए समर्पित है और इसे प्रकाश के पर्व के रूप में मनाया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन तीर्थ स्थलों में स्नान करने का विशेष महत्व है, जिससे पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है, जिससे पुण्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। वहीं देव दिवाली कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही मनाई जाती है, जो देवताओं की दिवाली के रूप में प्रसिद्ध है। इस दिन देवताओं का उत्सव मनाया जाता है और भगवान शिव और अन्य देवताओं की पूजा की जाती है। देव दिवाली का पर्व प्रकाश और ज्ञान का प्रतीक है, जो अज्ञानता को दूर करने और ज्ञान को प्राप्त करने का संदेश देता है। इस पर्व का आध्यात्मिक महत्व भी है, जो आत्म-ज्ञान और आत्म-साक्षात्कार की प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रकाश पर्व भी आज: सिख धर्म में गुरु नानक जयंती का विशेष महत्व है। उन्होंने समानता, सेवा और प्रेम का संदेश दिया था। इस खास अवसर पर लोग उनके उपदेशों को जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं। गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 ई. में ननकाना साहिब में हुआ था। उनके पिता का नाम मेहता कालू चंद एवं माता का नाम माता तृप्ता था। उन्होंने ईश्वर और सामाजिक न्याय का संदेश दिया। साथ ही सिख धर्म की स्थापना भी की थी। उन्होंने धर्म का संदेश फैलाने के लिए कई यात्राएं कीं। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों का विरोध किया और उन्हें दूर करने का भी प्रयास किया था। गुरु नानक जयंती को प्रकाश पर्व के रूप में भी मनाया जाता है, क्योंकि इस दिन गुरुद्वारों में कीर्तन और लंगर का आयोजन किया जाता है। नगर कीर्तन किया जाता है। गुरु नानक देव की शिक्षाओं के बारे में लोगों को बताया जाता है।

