भारत अपने निवेश को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। आज जब अमेरिका से ट्रंप टैरिफ और चाइना से चल रही तनातनी के बीच अब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी २९ अगस्त को टोक्यो में होने वाली बैठक में निवेश के मुद्दे को लेकर जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा से बातचीत करेंगे। यह भारत के लिए अपने निवेश में बढ़ोतरी करने की अच्छी पहल भी साबित हो सकेगी। यह माना जा रहा है कि जापान सरकार ने संकेत भी दिए हैं कि वे आने वाले 10 वर्षों में भारत में निजी क्षेत्र के जरिए करीब 68 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बनाएगी। इस लक्ष्य की आधिकारिक घोषणा संभवतय: बैठक के दौरान हो सकती है। जहां मई, 2023 में हिरोशिमा में जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह पहली यात्रा होगी। जापानी कारोबारियों ने तब से हर वित्तीय वर्ष में भारत में औसतन लगभग 1 ट्रिलियन येन का निवेश किया है। दोनों सरकारें एक आर्थिक सुरक्षा पहल शुरू करने की भी योजना बना रही हैं, जो आर्थिक सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक नया द्विपक्षीय सहयोग ढांचा है, जिसमें महत्वपूर्ण सामग्रियों की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना और मुख्य बुनियादी ढांचे की सुरक्षा की गारंटी देना जैसी चीजें शामिल होंगी। इनकी सबसे पहले पहल सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, दूरसंचार, स्वच्छ ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स और एआई जैसे वैज्ञानिक क्षेत्रों सहित प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता देना होगा। इसके अलावा एआई तकनीक और स्टार्टअप्स में सहयोग को विशेष रूप से आगे बढ़ाने के लिए एआई सहयोग पहल की स्थापना की जाएगी। इसके अलावा डिजिटल पार्टनरशिप 2.0 नामक एक परियोजना विकसित भी की जाएगी, जिससे मैन्युफैक्चरिंग से परे आर्थिक सहयोग का विस्तार करके सेमीकंडक्टर, एआई और स्टार्टअप्स जैसे उभरते तकनीकी क्षेत्रों को शामिल किया जा सके।

