दुनिया में पिछले काफी महीनों से ट्रम्प टैरिफ को लेकर बहुत हो हल्ला हो रहा है। हर तरफ ट्रम्प टैरिफ की हवा चल रही है, कई देश इससे घबराए हुए हैं। पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों ही स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से भारत के आत्मनिर्भर मिशन का ऐलान कर यह साबित कर दिया कि भारत किसी से कम नहीं है। वह किसी से झुका है और ना ही झुकेगा। उन्होंने यह संदेश दे दिया कि भारत वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार है। भारत के पास आत्मनिर्भरता का ऐसा हथियार है, जो ट्रंप के टैरिफ को चुनौती देने में सक्षम साबित हो सकेगा। वहीं इन अनिश्चितता के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी ओर से तैयारी कर ली है। उसने अपनी मौद्रिक नीति में सतर्कता का रुख अपनाया है। गत दिनों ही आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए केंद्रीय बैंक को बेहद सावधानी के साथ आगे बढऩे की आवश्यकता है। मौद्रिक नीति समिति की बैठक में सभी छह सदस्यों ने सर्वसम्मति से प्रमुख नीतिगत दर रेपो रेट को 5.5 फीसदी पर यथावत रखने के पक्ष में मतदान किया। यह भी कहा जा सकता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती, स्थिरता और अवसर की तस्वीर पेश करती है। भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति, विकास को बढ़ावा देने वाली नीतियां और दूरदर्शी रणनीति देश को एक मजबूत स्थिति में रखती है। ट्रम्प टैरिफ के बीच देश की वृद्धि दर स्थिर बनी हुई है और खाद्य कीमतों में नरमी से मुद्रास्फीति की स्थिति फिलहाल अनुकूल नजर आ रही है। हालांकि आने वाले महीनों में मुद्रास्फीति में हल्की बढ़ोतरी की उम्मीद भी बनी हुई है। ऐसे में आरबीआई फिलहाल मुद्रास्फीति और वैश्विक अनिश्चितताओं पर नजर रखते हुए सतर्कता की नीति पर कायम है। यदि आने वाले महीनों में वैश्विक हालात स्थिर रहते हैं, तो मौद्रिक नीति में बदलाव पर पुनर्विचार किया जा सकता है। ऐसे में नहीं लगता कि भारत को ट्रंप टैरिफ का दंश झेलना पड़े।

