भारत में जैसे-जैसे डिजिटलाइजेशन होता जा रहा है, वैसे-वैसे इसके फायदे के साथ नुकसान भी सामने आ रहे हैं। जहां बच्चों में लगातार मोबाइल फोन देखने से नुकसान भी सामने आ रहे हैं। आंखों के रोग में बढ़ोतरी और याददाश्त में भी कमी आती जा रही है। वहीं अब एआई के बढ़ते प्रभाव से फायदे तो हैं, लेकिन इसकी आईटी कंपनी में अधिकांश उपयोगिता बनने से युवाओं की छंटनी की जा रही है। इससे बी-टेक किए युवाओं को कंपनी अपने यहां कोई खास जगह नहीं दे रही। इससे बेरोजगारी को बढ़ावा मिल रहा है। पिछले तीन महीने पहले ही आईबीएम कंपनी, डिवॉक, टीसीएस जैसी कंपनियों ने बीटेक किए युवाओं के इंटरव्यू लेकर सलेक्शन भी कर लिए, पर एआई के बढ़त कदम से इन युवाओं को जॉइनिंग से वंचित होना पड़ा। अगर ऐसे हालत रहे तो भविष्य में कंपनियों में मनुष्यों की जरूरत कम और मशीनों (एआई) की जरूरत ज्यादा होगी। एआई के फायदों में मुख्यतय: सुव्यवस्थित करना, समय की बचत करना, पक्षपात को खत्म करना और दोहराए जाने वाले कार्यों को स्वचालित करना है। जबकि इससे होने वाले नुकसान में महंगा कार्यान्वयन, संभावित मानव नौकरी का नुकसान और भावना और रचनात्मकता की कमी है। रचनात्मकता की कमी का मतलब है कि एआई समस्याओं के लिए नए समाधान नहीं बना सकता है या किसी भी अत्यधिक कलात्मक क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल नहीं कर सकता है। तब तक यह रचनात्मक होने की क्षमता में मनुष्यों से आगे नहीं निकल पाएगा, तब तक इसके निर्णय लेने में बाधा आएगी। यदि कोई कंपनी किसी समस्या के लिए नए या रचनात्मक समाधान की तलाश कर रही है, तो मनुष्य ही उस समाधान को प्रदान करने में बेहतर सक्षम हैं।

