भारत में लगातार बढ़ रही तस्करी जी का जंजाल बनती जा रही है। गत दिनों ही राजस्थान के बाड़मेर जिले में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक हेरोइन की करीब ६०.३०२ किलोग्राम की खेप बरामद की गई, जिसका ३०० करोड़ रुपए का मूल्य आंका जा रहा है। इससे पहले भी डीडवाना में विदेशी हथियारों की तस्करी करते हुए एक जने का नामजद किया गया था। भारत में तस्करी की वारदातें पिछले काफी वर्षों से लगातार बढ़ रही हैं। आज तस्करी को रोकने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण की जरूरत है। इस ओर सरकार, समाज और जनता को मिलकर काम करना होगा ताकि इस समस्या का समाधान किया जा सके। पिछले काफी समय से इस पर अंकुश ना लग पाने के कई कारण हैं। मुख्य रूप से गरीबी, बेरोजगारी और कमजोर कानून प्रवर्तन तस्करी को बढ़ावा देते हैं। इसके अलावा कुछ मामलों में तस्करी करने वाले गिरोहों को राजनीतिक संरक्षण भी मिलता है। सरकार को इस ओर पहल करते हुए इन समस्याओं से निपटने के लिए ठोस उपाय करने चाहिए जैसे कि रोजगार के अवसर पैदा करना और गरीबों को आर्थिक सहायता प्रदान करना। वहीं तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को अधिक प्रभावी और कुशल बनाने की आवश्यकता है। इसमें उन्हें आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण प्रदान करना शामिल है। इसके अलावा तस्करी करने वाले गिरोहों को राजनीतिक संरक्षण मिलना एक गंभीर समस्या है। सरकार को इस समस्या से निपटने के लिए कठोर कदम उठाने चाहिए। तस्करी आज एक वैश्विक समस्या बनती जा रही है, इसलिए इसे रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भी आवश्यकता है। सरकार को अन्य देशों के साथ मिलकर काम करना चाहिए ताकि तस्करी को रोका जा सके।

