हर साल की भांति इस वर्ष आज के दिन भारत में राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस मनाया जाएगा ताकि महान भारतीय सांख्यिकीविद् प्रसांत चंद्र महालनोबिस को श्रद्धांजलि दी जा सके और यह समझाया जा सके कि आंकड़े किस तरह से देश की नीतियों और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह दिवस केवल सम्मान का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय संदेश है कि आधुनिक भारत को आगे बढ़ाने में आंकड़ों और सांख्यिकी विज्ञान का कितना बड़ा योगदान है। इस वर्ष की थीम निर्णय लेने के लिए आंकड़ों का उपयोग होगा। यह थीम यह दर्शाती है कि आज के दौर में नीतिगत और प्रशासनिक निर्णयों के लिए आंकड़ों का सही उपयोग कितना आवश्यक है। बढ़ते डिजिटल युग में जहां डेटा ही असली शक्ति है, यह विषय अत्यंत प्रासंगिक है। अगर इसके इतिहास की बात करें तो केंद्र सरकार ने वर्ष, 2007 में 29 जून को राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस घोषित किया। इसका उद्देश्य महालनोबिस की जयंती मनाना ही नहीं, बल्कि युवाओं और आम जनता को सांख्यिकी की उपयोगिता के बारे में जागरूक करना भी है। इस दिन का महत्व केवल एक व्यक्ति की उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आंकड़ों की ताकत और देश के विकास में उनके उपयोग को उजागर करने का अवसर भी है। इसका उद्देश्य छात्रों और शोधकर्ताओं में आंकड़ों की समझ का विकसित करना, डेटा साइंस में कॅरियर को बढ़ावा देना और सरकार और संगठनों को तथ्य आधारित निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित करना भी है।

