रक्षा क्षेत्र में बढ़ेगा निवेश, स्वदेशीकरण को मिलेगा बल
नई दिल्ली | BR News Network | Morgan Stanley ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बाधा उत्पन्न हो रही है, जिससे भारत में निवेश का बड़ा अवसर बन सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2030 तक भारत का investment-to-GDP ratio बढ़कर 37.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जो वर्तमान में 36.7 प्रतिशत है। Morgan Stanley का अनुमान है कि इस परिदृश्य में अगले पांच वर्षों के दौरान भारत में लगभग 800 अरब डॉलर का अतिरिक्त पूंजीगत निवेश देखने को मिल सकता है। इस निवेश का बड़ा हिस्सा ऊर्जा, डेटा सेंटर और रक्षा क्षेत्रों में केंद्रित रहेगा, जहां 60 प्रतिशत से अधिक पूंजी आवंटित होने की संभावना है।
निवेश चक्र में तेज उछाल की उम्मीद
Morgan Stanley के अनुसार, मध्य पूर्व तनाव से उत्पन्न अनिश्चितताओं के बीच भारत एक आकर्षक निवेश गंतव्य बन सकता है। निवेश में वृद्धि के साथ देश का investment-to-GDP अनुपात 37.5 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है, जो वर्तमान स्तर से स्पष्ट बढ़ोतरी को दर्शाता है। यह बदलाव वैश्विक पूंजी के भारत की ओर रुख करने का संकेत देता है।
800 अरब डॉलर का संभावित निवेश
अगले पांच वर्षों में लगभग 800 अरब डॉलर के अतिरिक्त पूंजीगत निवेश का अनुमान लगाया गया है। इस बड़े निवेश प्रवाह का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा ऊर्जा, डेटा सेंटर और रक्षा क्षेत्रों में जाएगा। यह भारत के infrastructure और औद्योगिक विकास को नई गति देने वाला साबित हो सकता है।
शेयर बाजार और कॉरपोरेट मुनाफे पर असर
मजबूत पूंजीगत व्यय चक्र का भारतीय शेयर बाजार पर दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। इससे GDP में कॉरपोरेट मुनाफे की हिस्सेदारी बढ़ेगी और आय में 15 प्रतिशत से अधिक की CAGR वृद्धि को समर्थन मिलेगा। रिपोर्ट के अनुसार, बाजार वित्त वर्ष 2031 की आय के 10 गुना तक पहुंच सकता है।
ऊर्जा और आत्मनिर्भरता पर फोकस
मध्य पूर्व संघर्ष ने आयातित ऊर्जा पर भारत की निर्भरता को उजागर किया है। वर्तमान में भारत अपनी लगभग 85 प्रतिशत कच्चे तेल और करीब आधी प्राकृतिक गैस की जरूरतों का आयात करता है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार रणनीतिक भंडारण, घरेलू कोयला उत्पादन और gasification को बढ़ावा, नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में वृद्धि और परमाणु परियोजनाओं के विस्तार जैसे कदम उठा रही है।
डेटा सेंटर और रक्षा क्षेत्र में तेज विकास
भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और data localization नीतियों के कारण डेटा सेंटर सेक्टर तेजी से उभर रहा है। अनुमान है कि भारत की डेटा सेंटर क्षमता 1.8 गीगावॉट से बढ़कर वित्त वर्ष 2031 तक 10.5 गीगावॉट हो जाएगी। वहीं, रक्षा क्षेत्र में भी संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां सरकार का लक्ष्य रक्षा खर्च को GDP के लगभग 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 2.5 प्रतिशत करना है, जिसमें स्वदेशीकरण और private sector की भागीदारी पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
यह रिपोर्ट संकेत देती है कि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां भारत के लिए अवसर में बदल सकती हैं, जहां रणनीतिक निवेश, आत्मनिर्भरता और दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती को नई दिशा मिल सकती है।

