नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीदों के बीच गुरुवार को वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 1प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इज़राइल और लेबनान के बीच युद्धविराम लागू करने पर सहमति बनने के बाद निवेशकों में यह उम्मीद जगी है कि ईरान से जुड़े मौजूदा संघर्ष को लेकर भी कोई व्यापक कूटनीतिक समाधान निकल सकता है। इससे क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक तनाव कम होने की संभावना बढ़ी है।
अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट कच्चा तेल 1.33 प्रतिशत गिरकर 96.50 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चा तेल भी 1प्रतिशत से अधिक टूटकर 94.76 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। यह गिरावट ऐसे समय आई है जब पिछले कारोबारी सत्र में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी। उस दौरान पश्चिम एशिया में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने बाजार की चिंताओं को बढ़ा दिया था। ईरान की ओर से कुवैत पर किए गए हमलों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के निकट अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने तेल आपूर्ति को लेकर आशंकाएं बढ़ा दी थीं।
अमेरिका में रिपब्लिकन दल के नियंत्रण वाली प्रतिनिधि सभा ने एक प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने की शक्तियों को सीमित करने की मांग की गई है। इस कदम को क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ चल रही बातचीत में इस सप्ताहांत तक कोई सकारात्मक प्रगति देखने को मिल सकती है। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि वाशिंगटन के साथ संपर्क पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं, हालांकि अब तक वार्ताओं से कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। दोनों पक्ष एक-दूसरे के प्रस्तावों की समीक्षा कर रहे हैं।
इसके बावजूद खाड़ी क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ईरानी ड्रोन ने कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाया, जिसके कारण कई लोग घायल हुए और हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। कुवैती सेना के अनुसार हमले से भारी भौतिक क्षति हुई, जिसके बाद हवाई यातायात संचालन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। वैश्विक शेयर बाजारों में भी कमजोरी का माहौल बना रहा। एशिया के प्रमुख सूचकांकों में जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंग सेंग, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और इंडोनेशिया का जकार्ता कंपोजिट सूचकांक शामिल हैं, जिनमें 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी शेयर बाजार भी दबाव में रहे। एसएंडपी 500 सूचकांक 0.74 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि नैस्डैक सूचकांक 0.9 प्रतिशत नीचे बंद हुआ।
घरेलू शेयर बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। गुरुवार को कारोबार की शुरुआत में Sensex और Nifty लगभग 0.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ खुले। सूचना प्रौद्योगिकी, रियल एस्टेट, औषधि और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के शेयरों में बिकवाली के दबाव के कारण बाजार पर नकारात्मक असर पड़ा। निवेशक फिलहाल पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर नजर बनाए हुए हैं।

