Friday, July 24, 2026 |
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बीमा प्रीमियम में एक हजार फीसदी तक उछाल

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण खाड़ी मार्गों पर जहाजों का बढ़ता जोखिम

by Business Remedies
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नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क | एक तरफ जहां America-Iran युद्ध से कई उद्योग-धंधे प्रभावित हो रहे हैं, वहीं खाड़ी क्षेत्र के शिपिंग मार्गों पर संचालित जहाजों के लिए बीमा प्रीमियम में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई। Equirus Raghnall Insurance Broking के विश्लेषण के अनुसार, उच्च जोखिम वाले शिपिंग मार्गों पर War Risk Insurance Premium पिछले कुछ महीनों में 200-300 प्रतिशत तक बढ़ गया है और कुछ मामलों में इसमें 1,000 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी देखी गई है।

कच्चे तेल के आयात की लागत भी बढ़ सकती है

रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे अधिक जोखिम वाले समुद्री मार्गों के लिए बीमा प्रीमियम जहाज के मूल्य के लगभग 0.2-0.5 प्रतिशत से बढ़कर 3-5 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिससे समुद्री यात्रा की लागत में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है।

रिपोर्ट में बताया गया कि यदि मौजूदा व्यवधान लंबे समय तक जारी रहते हैं, तो भारत के कच्चे तेल के आयात की लागत बढ़ सकती है।

युद्ध जोखिम बीमा की कीमतों में होती बढ़ोतरी

हालांकि बीमा कुल Logistics Cost का केवल एक हिस्सा है, लेकिन War Risk Insurance की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी भारत में आयातित कच्चे तेल की अंतिम लागत को काफी बढ़ा सकती है, खासकर उन खेपों के लिए जो West Asia से आती हैं या वहां से होकर गुजरती हैं।

अंडरराइटिंग के नियम भी होंगे सख्त

Equirus Raghnall Insurance Broking के निदेशक Amit Goyal ने कहा कि War Risk Insurance Premium में वृद्धि के साथ-साथ जहाज के ढांचे (Hull), Machinery Risk और सुरक्षा से जुड़े अतिरिक्त खर्च भारत में कच्चे तेल के आयात की लागत बढ़ा देंगे।

उन्होंने कहा कि भले ही प्रमुख समुद्री मार्गों को औपचारिक रूप से बंद न किया जाए, फिर भी बीमा और Reinsurance कंपनियां जोखिम का दोबारा आकलन करेंगी। इसके परिणामस्वरूप बीमा प्रीमियम बढ़ेंगे, Underwriting के नियम सख्त होंगे और कुछ मामलों में बीमा उपलब्धता भी घट सकती है।

वैश्विक समुद्री बीमा क्षमता पर बढ़ सकता है दबाव

रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका असर केवल Middle East से आने वाले कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहेगा। यदि व्यवधान लंबे समय तक बना रहता है, तो वैश्विक समुद्री बीमा क्षमता पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे भारत आने वाले रूसी कच्चे तेल के शिपमेंट का बीमा भी महंगा हो सकता है, खासकर यदि टैंकरों की उपलब्धता घटती है या जहाजों को अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में संचालन करना पड़ता है।

जोखिम बीमा प्रीमियम को करते रहेंगे प्रभावित

Amit Goyal के अनुसार, भारत का समुद्री बीमा बाजार लगभग 5,500 करोड़ रुपए से 5,800 करोड़ रुपए के बीच आंका जाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि निकट भविष्य में समुद्री बीमा की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहेंगी, क्योंकि भू-राजनीतिक घटनाक्रम War Risk Insurance Premium को प्रभावित करते रहेंगे। हालांकि, यदि क्षेत्रीय तनाव में लगातार कमी आती है, तो समय के साथ बीमा प्रीमियम पर दबाव कम हो सकता है।



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