Monday, July 13, 2026 |
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फसल अवशेष प्रबंधन के लिए ₹.544.15 करोड़ का प्रावधान, पराली जलाने पर रोक के लिए सरकार ने तेज किए प्रयास

by Business Remedies
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Government allocates ₹.544.15crore for Crop Residue Management to curb stubble burning in India

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत ₹.544.15करोड़ का प्रावधान किया है। इस राशि में से पहली किस्त के रूप में ₹.272.07करोड़ पहले ही जारी किए जा चुके हैं। कृषि मंत्रालय के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य पराली जलाने की समस्या का स्थायी समाधान करना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। फसल अवशेष प्रबंधन योजना की शुरुआत वर्ष 2018-19 में की गई थी। तब से लेकर अब तक पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद को कुल ₹.4,266.47 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की जा चुकी है। सरकार का मानना है कि इस योजना के माध्यम से पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है।

सरकारी सहायता के तहत राज्यों में अब तक 3.54 लाख से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों का वितरण किया जा चुका है। इसके साथ ही 43,500 से अधिक कस्टम हायरिंग केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिससे किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण आसानी से उपलब्ध हो सकें और पराली के वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा मिले। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में पराली प्रबंधन और उसके स्थायी समाधान को लेकर एक उच्चस्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक आयोजित की गई। बैठक में फसल अवशेष प्रबंधन योजना की प्रगति और आगामी धान कटाई सत्र के दौरान पराली के प्रभावी प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा की गई।

कृषि मंत्री ने कहा कि पराली जलाना केवल पर्यावरण को प्रदूषित नहीं करता, बल्कि धरती माता के स्वास्थ्य को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। इससे लाभकारी कीट नष्ट हो जाते हैं, मिट्टी की उर्वरता घटती है और वायु प्रदूषण के कारण आम लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि इन कारणों से पराली जलाने पर रोक लगाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि चालू वर्ष के लिए राज्यों ने महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं। इनमें 46,000 से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों का वितरण, 910 कस्टम हायरिंग केंद्रों की स्थापना तथा 141 पराली आपूर्ति श्रृंखला परियोजनाओं का विकास शामिल है।

बैठक में वर्ष 2026 के धान कटाई सत्र के दौरान अनुमानित 2.762 करोड़ टन पराली के प्रबंधन के लिए राज्यों द्वारा तैयार की गई कार्य योजनाओं की भी समीक्षा की गई। सरकार का लक्ष्य है कि पराली को कृषि अपशिष्ट के बजाय आर्थिक संसाधन में बदला जाए।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों, स्थानीय निकायों और किसानों के निरंतर प्रयासों के कारण पिछले वर्षों में पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। बैठक में दोनों मंत्रियों ने पराली के बाह्य उपयोग को और मजबूत बनाने पर बल दिया। इसके तहत जैव-ईंधन विद्युत संयंत्र, संपीड़ित जैव गैस इकाइयां, एथेनॉल उत्पादन संयंत्र तथा ईंधन कण निर्माण इकाइयों को बढ़ावा देने की रणनीति पर चर्चा की गई। उनका कहना था कि ऐसे प्रयास पराली के लिए स्थायी बाजार तैयार कर रहे हैं और कृषि अवशेषों को आर्थिक संसाधनों में परिवर्तित कर रहे हैं।



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